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मथुरा 25 मार्च । ड्रोन प्रौद्योगिकी कृषि, रक्षा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में क्रांति ला रही है, जो तेज डेटा संग्रह, लागत प्रभावशीलता और सटीक संचालन प्रदान करती है। कृषि में यह कीटनाशकों के छिड़काव, फसल निगरानी और मिट्टी के विश्लेषण को आसान बनाती है। ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रोजगार के व्यापक अवसर हैं, इसलिए युवाओं को इस तकनीक की गहन जानकारी होनी जरूरी है। यह बातें राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, मथुरा द्वारा आयोजित कार्यशाला में ड्यूकैट नोएडा के ड्रोन टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ सौरभ यादव ने एमसीए द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों को बताईं। श्री यादव ने छात्र-छात्राओं को बताया कि ड्रोन जिन्हें हम मानवरहित विमान प्रणाली कहते हैं, बिना पायलट के स्वचालित रूप से संचालित होने वाले हवाई प्लेटफॉर्म हैं, जो सेंसर और विश्लेषणात्मक तकनीकों के साथ मिलकर मूल्यवान डेटा एकत्र करने और उसका विश्लेषण करने में सक्षम बनाते हैं। उन्होंने कहा कि ड्रोन पारम्परिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक भौगोलिक पैमाने पर निरीक्षण और फुटेज प्रदान कर सकते हैं, जिससे बुनियादी ढांचे की स्थिति का समग्र अवलोकन मिलता है और कम्पनियों को डेटा-आधारित निर्णय लेने में मदद मिलती है।

ड्रोन टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ ने बताया कि डेटा के प्रसंस्करण और विश्लेषण को स्वचालित करने के लिए डिजिटल ट्विन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग को एकीकृत करके ड्रोन निरीक्षण तकनीकों को और भी उन्नत बनाया जा सकता है। ड्रोन का उपयोग परिवहन, बांध, रियल एस्टेट, दूरसंचार, विद्युत प्रतिष्ठान, सिंचाई परियोजनाएं, स्टेडियम, बंदरगाह और शहरी नियोजन सहित विभिन्न प्रकार के अवसंरचना क्षेत्रों और परियोजनाओं में किया जाता है। उन्होंने कहा कि ड्रोन प्रौद्योगिकी में निपुण छात्र-छात्राओं को रोजगार के व्यापक अवसर और दीर्घकालिक करियर विकास में मदद मिलती है।   श्री यादव ने विद्यार्थियों को ड्रोन के निर्माण, संचालन, उपयोगिता तथा इसके विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। साथ ही, ड्रोन टेक्नोलॉजी के करियर अवसरों और इंडस्ट्री में इसकी बढ़ती मांग पर भी प्रकाश डाला। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विशेषज्ञ से अपने सवालों के उत्तर प्राप्त किए।

संस्थान के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट प्रमुख डॉ. विकास जैन ने अतिथि वक्ता सौरभ यादव को स्मृति चिह्न भेंटकर उनका आभार माना। डॉ. जैन ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को उद्योग जगत की नवीनतम तकनीकों से जोड़ने का कार्य करती हैं और उनके करियर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम के अंत में संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने ड्यूकैट, नोएडा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेषज्ञ के ज्ञान, अनुभव और छात्र-छात्राओं के साथ साझा किए गए महत्वपूर्ण विचारों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।

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