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अलीगढ़ 25 मार्च । मंगलायतन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च द्वारा “नारी शक्तिरू भारतीय सांस्कृतिक परंपरा एवं ज्ञान प्रणाली में महिलाओं की भूमिका और प्रतिनिधित्व” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल समापन हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय परंपरा में नारी की गरिमामयी भूमिका को पुनस्र्थापित करना तथा नई पीढ़ी को इससे जोड़ना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। कुलसचिव ब्रिगेडियर डा. समरवीर सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सृजन शक्ति के रूप में देखा गया है और समाज के संतुलित विकास के लिए महिलाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

डीन एकेडमिक प्रो. अम्बरीष शर्मा ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही महिलाओं को सशक्त बनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। मुख्य वक्ता हाॅकी वाली सरपंच के नाम से प्रसिद्ध नीरू यादव ने कहा कि बेड़ियों को तोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन लक्ष्य प्राप्ति के लिए कठिनाइयों से जूझना आवश्यक है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ से जुड़े अपने अनुभवों और कौन बनेगा करोड़पति में भागीदारी तक के संघर्षपूर्ण सफर को साझा करते हुए विद्यार्थियों को दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास का संदेश दिया। द्वितीय सत्र में डीएस कालेज की प्रो. सुनीता गुप्ता ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नारी-पुरुष के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग क्षमताएं और प्रतिभाएं निहित होती हैं। उन्होंने भारतीय पुराणों की ओर पुनः दृष्टि डालने का आह्वान किया। वहीं टीआर कालेज की प्राचार्या प्रो. लकी वाष्र्णेय ने कहा कि लैंगिक भेदभाव सामाजिक असंतुलन को जन्म देता है, इसलिए नारी सशक्तिकरण पर निरंतर कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता भी जताई। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को सम्मानित किया गया। संचालन डा. मनीषा उपाध्याय ने किया, जबकि स्वागत भाषण प्रो. दिनेश पांडेय ने प्रस्तुत किया। आयोजन में प्रो. दीपशिखा सक्सेना, डा. पूनम रानी, डा. प्रीती पंकज गुप्ता, डा. प्रेमलता का विशेष योगदान रहा।

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