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लखनऊ 24 मार्च । उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन में मंगलवार को ‘नेक्स्ट-जेन’ सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म ‘निवेश मित्र 3.0’ का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने ‘यूपी प्राइवेट बिजनेस पार्क डेवलपमेंट स्कीम-2025’ और ‘प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल शेड्स योजना’ का भी अनावरण कर औद्योगिक विकास को नई दिशा दी। डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर मॉडल पर आधारित ये दोनों पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) योजनाएं निवेशकों को विश्वस्तरीय ‘रेडी-टू-ऑपरेट’ इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएंगी, जिससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया तेज और सरल होगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 85 से अधिक लेटर्स ऑफ कम्फर्ट (LoCs), पात्रता प्रमाण पत्र (ECS) और ₹2781 करोड़ की सब्सिडी वितरित करते हुए इसे निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2022, फूड प्रोसेसिंग नीति 2023, इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2020 और एफडीआई नीति 2023 के तहत इन निवेश प्रस्तावों से कुल मिलाकर लगभग ₹50,000 करोड़ निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावनाएं बनी हैं।

निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत स्टील, सीमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल और बेवरेज जैसे क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों को इंसेंटिव और LoCs प्रदान किए गए। गैलेंट इस्पात, जे.के. सीमेंट, वरुण बेवरेजेज, वंडर सीमेंट, यूनिलीवर इंडिया और हल्दीराम जैसी कंपनियों के साथ-साथ बलरामपुर चीनी मिल्स, ड्रीमटेक इलेक्ट्रॉनिक्स, अल्ट्राटेक सीमेंट और एस्कॉर्ट्स कुबोटा को भी बड़े निवेश प्रस्तावों के साथ प्रोत्साहित किया गया। इसके अलावा हैवेल्स, मिंडा कॉर्पोरेशन, इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स (सोनालिका) और फिजिक्स वाला जैसी कंपनियों की परियोजनाएं भी इस औद्योगिक विस्तार का हिस्सा बनीं हैं।

इन निवेश प्रस्तावों से बायोप्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, कृषि उपकरण, एडटेक और खाद्य प्रसंस्करण जैसे विविध क्षेत्रों में विकास को गति मिलेगी, जिससे उत्तर प्रदेश एक बहुआयामी औद्योगिक हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। इसके साथ ही उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए इन्वेस्ट यूपी द्वारा एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेल व कौशल कनेक्ट सेल की स्थापना हेतु समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इन पहलों से उद्योग और कौशल के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे।

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