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हाथरस 23 मार्च । सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को लोकभवन में  कैबिनेट बैठक हुई। इसमें 39 प्रस्ताव पेश किए गए, जिनमें से 37 प्रस्तावों पर मोहर लगी।  जबकि 2 प्रस्तावों (प्रस्ताव संख्या 20 और 21) को स्थगित कर दिया गया है। बैठक का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु प्रदेश के किसान रहे। सरकार ने आगामी रबी विपणन सत्र के लिए गेहूं खरीद की नीति स्पष्ट कर दी है, जिससे अन्नदाताओं की आय में सीधा इजाफा होगा। वहीं, कृषि मंत्री ने कहा कि उतराई, छनाई व सफाई के लिए किसानों को 20 रुपये प्रति कुंतल अलग से दिया जाएगा। किसानों ने इस साल प्रदेश के भीतर काफ़ी अच्छी फसल लगाई है। कृषि विभाग ने उन्हें पर्याप्त मात्रा में बीज भी उपलब्ध कराए हैं। पर्याप्त मात्रा में इसकी खरीद की जाए, जिससे किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं उठाना पड़े।

प्रदेश मंत्रिपरिषद ने राज्य के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की सेवा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से “औद्योगिक विकास प्राधिकरण केंद्रीयकृत सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026” को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के साथ वर्ष 2018 में लागू नियमावली में व्यापक संशोधन का रास्ता साफ हो गया है। सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य विभिन्न औद्योगिक प्राधिकरणों, विशेष रूप से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के बीच वेतनमान, भत्तों और सेवा शर्तों में मौजूद असमानताओं को खत्म करना है। नई नियमावली लागू होने के बाद इन संस्थाओं में कार्यरत कार्मिकों को समान अवसर और बेहतर सेवा संरचना मिल सकेगी।

प्रस्ताव के अनुसार, 2018 की नियमावली में समय-समय पर किए गए संशोधनों के बावजूद कई विसंगतियां बनी हुई थीं, जिन्हें दूर करने के लिए यह द्वितीय संशोधन लाया गया है। संशोधित नियमावली के तहत सेवा शर्तों को अधिक स्पष्ट, संगठित और प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा, जिससे प्रशासनिक दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है। कैबिनेट के इस निर्णय से न केवल कर्मचारियों के मनोबल में वृद्धि होगी, बल्कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली भी अधिक सुव्यवस्थित और परिणामोन्मुख बनेगी। सरकार का मानना है कि एकरूप सेवा ढांचा निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार करेगा और औद्योगिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। राज्य सरकार लंबे समय से औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नीतिगत सुधारों पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो प्राधिकरणों को अधिक सक्षम, जवाबदेह और निवेश-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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