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मथुरा 23 मार्च । केडी मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर में सोमवार को लगे निःशुल्क लीवर फाइब्रोस्कैन परीक्षण शिविर में लगभग तीन सौ से अधिक मरीज लाभान्वित हुए। विशेषज्ञ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. मोहम्मद जुबेर की देखरेख में लगे शिविर में चिकित्सा पेशेवरों ने फाइब्रोस्कैन के माध्यम से मरीजों का लीवर फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, हेपेटाइटिस बी और सी वायरस परीक्षण आदि किए। शिविर में मरीजों की निःशुल्क जांच के साथ उन्हें नैदानिक और आहार परामर्श भी प्रदान किया गया। फ्री फाइब्रोस्कैन जांच शिविर में सुबह से ही मरीजों के आने का सिलसिला जारी रहा। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. मोहम्मद जुबेर ने बताया कि केडी हॉस्पिटल में लगे निःशुल्क फाइब्रोस्कैन जांच शिविर में मरीजों के फैटी लीवर,  अल्कोहलिक लीवर, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और हेपेटाइटिस बी और सी की जांचें की गईं। इतना ही नहीं मरीजों को एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा भी प्रदान की गई।

डॉ. जुबेर ने बताया कि हमारे देश में लीवर की बीमारी आम है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार देश की लगभग 32 फीसदी आबादी को लीवर की समस्या है। लीवर की लगातार समस्या के कारण लीवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस ठीक से काम नहीं करता और मरीज की जान चली जाती है। डॉ. जुबेर ने बताया कि क्रोनिक यकृत रोग का सबसे आम कारण एनएएफएलडी (गैर-अल्कोहल फैटी लीवर रोग) है, जो एक जीवनशैली से संबंधित बीमारी है, जो अनुचित आहार, व्यायाम की कमी, पेट के आसपास वसा की प्रवृत्ति तथा रक्त में लिपिड और शर्करा संबंधी समस्याओं के कारण होती है, जो लगभग एक तिहाई भारतीय आबादी में पाई जाती है।

डॉ. जुबेर ने बताया कि लीवर की परेशानी के अन्य कारणों में शराब और हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण हैं। उन्होंने कहा कि फैटी लीवर की समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए वरना रोगी फाइब्रोसिस और सिरोसिस के साथ क्रोनिक लीवर रोग की गिरफ्त में आ सकता है। उन्होंने कहा कि मरीज समय से लीवर फंक्शन टेस्ट कराकर अन्य परेशानियों से बच सकता है। डॉ. जुबेर ने कहा कि जब तक रोगियों में पीलिया, जलोदर, मस्तिष्क विकृति और रक्तस्राव जैसे लक्षण विकसित होते हैं, तब तक यकृत रोग गंभीर हो चुका होता है और रोगी का जीवनकाल काफी कम हो जाता है।

डॉ. जुबेर ने बताया कि लीवर फाइब्रोस्कैन एक दर्द रहित, नॉन-इनवेसिव (बिना चीर-फाड़) और तेज परीक्षण है, जो लीवर की कठोरता (फाइब्रोसिस) और फैट (फैटी लीवर) की सटीक मात्रा मापता है। यह पारम्परिक बायोप्सी का एक सुरक्षित विकल्प है, जो लीवर सिरोसिस, सूजन और डैमेज का शुरुआती चरणों में पता लगाकर तुरंत उपचार में मदद करता है। शिविर की सफलता में डॉ. लोकेश चौधरी, डॉ. मनीष प्रताप सिंह, टेक्नीशियन सचिन उपाध्याय, अंकुश यादव, सौरभ शर्मा, हीरा गोस्वामी आदि का अहम योगदान रहा।

चेयरमैन मनोज अग्रवाल ने कहा कि केडी मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर का उद्देश्य प्रत्येक रोगी का सही परीक्षण और उपचार है। श्री अग्रवाल ने कहा कि केडी हॉस्पिटल निःशुल्क चिकित्सा शिविरों के माध्यम से ब्रज क्षेत्र के साथ ही आसपास के जिले के लोगों को लगातार लाभान्वित कर रहा है।

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