
सिकंदराराऊ (हसायन) 24 फरवरी । कस्बे के नगला रति मार्ग स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में सोमवार को स्वास्थ्य कर्मियों की कथित लापरवाही के चलते एक 35 वर्षीय महिला की प्रसव के बाद मौत हो गई। सुरक्षित प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) के बावजूद अत्यधिक रक्तस्राव होने और समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण महिला ने अलीगढ़ ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मृतका ने अपनी सातवीं संतान के रूप में एक बेटी को जन्म दिया था।
डिलीवरी के बाद बिगड़ी हालत, दर-दर भटके परिजन
जानकारी के अनुसार, ग्राम श्यामपुर (हरिनगर) निवासी रीना देवी (35) पत्नी राजेश कुमार को सोमवार (23 फरवरी) को प्रसव पीड़ा होने पर सीएचसी हसायन लाया गया था। सुबह 11 बजे महिला ने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के तुरंत बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। वहां तैनात स्टाफ नर्स ने उपचार का प्रयास किया, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर उसे हाथरस जिला अस्पताल (हायर सेंटर) रेफर कर दिया गया।
हाथरस से अलीगढ़ तक का सफर बना अंतिम यात्रा
परिजनों ने बताया कि वे जच्चा को लेकर हाथरस के सरकारी और निजी अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन गंभीर हालत देख सभी ने उपचार से हाथ खड़े कर दिए। अंततः परिजन उसे अलीगढ़ ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही रीना ने दम तोड़ दिया। अलीगढ़ के एक निजी अस्पताल पहुँचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मंगलवार को मृतका का गांव में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
सात बेटियों के सिर से हटा माँ का साया
रीना देवी की यह सातवीं डिलीवरी थी। उनके पहले से ही छह बेटियां हैं और अब सातवीं भी बेटी ही हुई है। माँ की मौत के बाद इन सात मासूम बच्चों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पूरे गांव में इस घटना को लेकर गहरा शोक व्याप्त है।
जिम्मेदारों की चुप्पी और अनभिज्ञता
इस मामले में जब संबंधित महिला स्वास्थ्य कार्यकत्री दीपा से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने ड्यूटी पर होने के बावजूद कमरे से बाहर आने या बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अंकुश सिंह ने संवेदनहीनता दिखाते हुए कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है और वे अब इस संबंध में पता लगाएंगे।












