आगरा 18 फरवरी । हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड कम्प्यूटर स्टडीज़ (एचआईएमसीएस) में एमबीए-एमसीए के 1997 बैच से लेकर 2003 बैच तक के पूर्व विद्यार्थियों हेतु एक यादगार एलुमनी मीट का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 50+ एलुमनी देश के विभिन्न राज्यों से संस्थान पहुँचे, जबकि कुछ एलुमनी ने दुबई और सिंगापुर से विशेष रूप से आकर कार्यक्रम को गौरवान्वित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य एलुमनी को एक साझा मंच पर जोड़कर नेटवर्किंग, मेंटोरशिप, करियर-गाइडेंस और संस्थान–उद्योग सहयोग को मजबूत करना रहा। एलुमनी ने कैंपस भ्रमण किया, पुराने साथियों से मुलाकात की और अपने कॉलेज-समय की स्मृतियाँ साझा कर माहौल को भावनात्मक और जीवंत बना दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ, जिसमें एचआईएमसीएस के प्रथम बैच के छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। वर्तमान बैच के छात्रों ने अपने सबसे वरिष्ठ छात्रों के लिए नृत्य, गायन और कुछ मनोरंजक खेलों का प्रदर्शन किया। प्रो. वी. के. शर्मा ((कार्यकारी उपाध्यक्ष, एसजीआई)) ने कहा कि “एलुमनी किसी भी संस्थान की सबसे मजबूत ब्रांड-इक्विटी होती है। एचआईएमसीएस का प्रयास है कि यह रिश्ता केवल स्मृतियों तक सीमित न रहे, बल्कि मेंटोरशिप, इंडस्ट्री-लिंकेंज और स्टूडेंट-डेवलपमेंट के रूप में निरंतर मूल्य बनाए।” डॉ. अभिलाषा सिंह राघव (निदेशिका, एचआईएमसीएस) ने कहा कि “आज का एलुमनी मीट हमारे लिए ‘रीयूनियन’ से ज्यादा ‘री-कनेक्ट एंड री-बिल्ड’ का मंच रहा। हमारे पूर्व विद्यार्थी अलग-अलग सेक्टर्स और देशों में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं—यह एचआईएमसीएस की सीख और उनकी मेहनत का साझा परिणाम है। हम एलुमनी के साथ मिलकर इंटर्नशिप, करियर-गाइडेंस और लाइव प्रोजेक्ट्स के जरिए वर्तमान विद्यार्थियों के लिए अवसरों का मजबूत पुल बनाएंगे।”
मनीष गुप्ता (निदेशक प्रशासन, हिंदुस्तान कैंपस) ने कहा कि “इतने वर्षों के बाद भी एलुमनी का संस्थान से जुड़कर लौटना, कैंपस कल्चर और संस्थागत सिस्टम पर भरोसे को दर्शाता है। एसजीआई को पूर्व छात्रों से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता की आवश्यकता नहीं है। हमें आपके मार्गदर्शन और मजबूत करियर संबंध की आवश्यकता है।” कार्यक्रम के दौरान कई एलुमनी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एचआईएमसीएस ने उन्हें प्रोफेशनल लाइफ के लिए मजबूत आधार, आत्मविश्वास और “लाइफ-स्किल्स” दीं। कुछ एलुमनी ने यह भी बताया कि संस्थान में मिली डिसिप्लिन, प्रेज़ेंटेशन स्किल्स, टीमवर्क और वैल्यू-बेस्ड लर्निंग आज भी उनके करियर में निर्णायक भूमिका निभा रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत एलुमनी ने भी कहा कि एचआईएमसीएस की सीख ने उन्हें ग्लोबल वर्ककल्चर में तेजी से एडजस्ट होने में मदद की। एलुमनी ने संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगे भी सहयोग का भरोसा दिया—जैसे गेस्ट लेक्चर, इंटर्नशिप/प्लेसमेंट सपोर्ट, इंडस्ट्री विज़िट, लाइव प्रोजेक्ट्स और स्टूडेंट मेंटोरिंग के माध्यम से। कई एलुमनी ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ मुलाकात नहीं, बल्कि “कनेक्शन को एक्शन” में बदलने का प्लेटफॉर्म है, जिससे वर्तमान विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। एचआईएमसीएस परिवार ने सभी एलुमनी का गर्मजोशी से स्वागत किया और आश्वस्त किया कि ऐसे आयोजन नियमित रूप से किए जाएंगे ताकि एलुमनी एंगेजमेंट इकोसिस्टम और अधिक मजबूत बने तथा विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों के द्वार खुलें। समापन में संस्थान की ओर से सभी एलुमनी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया और भविष्य में और भी व्यापक सहभागिता के साथ अगले एलुमनी मीट के आयोजन की घोषणा/संकेत दिया गया।
पुराने एलुमनी के विचार
• 1997–2003 बैच के एलुमनी : “एचआईएमसीएस हमारे लिए सिर्फ कॉलेज नहीं था—यहाँ से हमें सोचने का तरीका, अनुशासन और करियर की दिशा मिली। आज अलग-अलग शहरों/देशों में होने के बावजूद, यह कैंपस वही अपनापन देता है।”
• कॉरपोरेट में कार्यरत एलुमनी: “क्लासरूम लर्निंग के साथ जो प्रैक्टिकल एक्सपोज़र मिला, उसने इंटरव्यू और जॉब लाइफ दोनों में आत्मविश्वास बढ़ाया। आज टीम हैंडलिंग और कम्युनिकेशन में वही बेस काम आता है।”
• विदेश से आए एलुमनी (Dubai/Singapore): “हजारों किलोमीटर दूर रहकर भी एचआईएमसीएस से भावनात्मक जुड़ाव बना रहा। यहाँ लौटकर लगा कि रूट्स वही हैं—बस ग्रोथ ग्लोबल हो गई है।”

















