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मथुरा 16 फरवरी हर समयकाल में भारतीयों ने विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में समूची दुनिया में अपनी बौद्धिकता का परचम फहराया है। सिंधु घाटी सभ्यता, वैदिक युग और उसके बाद के कालखंडों में भी भारतीयों ने विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में महान उपलब्धियां हासिल की हैं। आधुनिक समय में भी कई भारतीय वैज्ञानिकों ने अभूतपूर्व कार्य किए हैं। उनमें से कुछ को तो विज्ञान और नवाचार में उनके योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार तक मिल चुका है। यह सारगर्भित बातें केडी विश्वविद्यालय द्वारा अखण्ड भारतः विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भारतीयों के योगदान विषय पर आयोजित संगोष्ठी में विद्वतजनों ने मेडिकल छात्र-छात्राओं को बताईं। संगोष्ठी का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर मार्ल्यापण और दीप प्रज्वलित कर किया गया। अतिथि वक्ताओं का स्वागत केडी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल, उप कुलसचिव हेमा जोशी, आयोजन सचिव डॉ. गुलशन कुमार आदि ने किया। अतिथि वक्ता डॉ. विनीता गुप्ता ने विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय ऋषि-मुनियों के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का वैज्ञानिक अन्वेषण और विकास का इतिहास वैदिक काल से जुड़ा है। प्रसिद्ध गणितज्ञ आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार किया। वर्ग, वृत्त, त्रिभुज, भिन्न, बीजगणितीय सूत्र और खगोल विज्ञान की अवधारणाएं सभी वैदिक साहित्य में ही निहित हैं। डॉ. गुप्ता ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने गणित, युद्धकला, ज्यामिति, खगोल विज्ञान, चिकित्सा, अंतरिक्ष विज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान और वनस्पति विज्ञान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। डॉ. वीरेन्द्र मिश्रा ने मौजूदा समय की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि फिलवक्त भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा वैज्ञानिक और इंजीनियर समूह है। भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिन्होंने स्वदेशी परमाणु प्रौद्योगिकी विकसित की है। भारत उन कुछ देशों में से है जिन्होंने बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित की हैं। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत जीएसएलवी उपग्रहों को प्रक्षेपण करने में सक्षम है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान ने घातक बीमारियों के उपचार और उन्मूलन से लेकर विश्व को समझने तक, विश्व के कामकाज के तरीके को बदल दिया है।

संगोष्ठी में के.डी. मेडिकल कॉलेज के डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका और परीक्षा नियंत्रक डॉ. अम्बरीश कुमार ने विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज हमारा देश सूचना प्रौद्योगिकी तथा सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अग्रणी राष्ट्रों में शामिल है। संगोष्ठी में अजय शर्मा ने विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भविष्य की सम्भावनाओं पर कहा कि आज भारत न्यूट्रिनो, गुरुत्वाकर्षण तरंगें, स्क्रैमजेट, अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजना और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसी अधिक उन्नत तकनीकों में प्रगति कर रहा है। भारत को इनोवेशन हब बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में जो नीतियां बनीं, जो निर्णय हुए, उसका ही असर अब साफ-साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और नवाचार में भारत का भविष्य उज्ज्वल और नेतृत्त्वकारी है। श्री शर्मा ने बताया कि भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक में 38वें तथा शोध प्रकाशनों में दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जो एक वैश्विक अनुसंधान केंद्र बनने की दिशा में इसकी तेजी को दर्शाता है। संगोष्ठी का संचालन जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. गुलशन कुमार ने किया। अंत में कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल ने अतिथि वक्ताओं का बहुमूल्य समय और मार्गदर्शन देने के लिए आभार माना।

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