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मथुरा 13 फरवरी । संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से उपस्थित अतिथियों और विद्यार्थियों को जमकर मनोरंजन किया। जहां एक ओर ओज के कवियों ने विद्यार्थियों में देश, संस्कृति के प्रति जोश भरा तो वहीं श्रृंगार के कवियों ने युवा ह्रदयों को अपनी रचनाओं से सुखद एहसासों में डुबो दिया। इस विशाल कवि सम्मेलन में आए हास्य कवियों ने अपने व्यंग्य बाणों से सबको खूब हंसाया और गुदगुदाया। प्रसिद्ध कवि सुरेश अलबेला कवि सम्मेलन में मुख्य आकर्षण का केंद्र बने। उन्होंने अपने तीखे व्यग्य वाले चुटकुलों से विद्यार्थियों और अतिथिओं को हंसते-हंसते पेट पकड़ने को मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि, नर को नर माला पहनाए ये भी गजब तरीका है, जनसंख्या कम करने का ये भी अजब तरीका है। उन्होंने पाकिस्तान को लेकर अपने छोटे-छोटे चुटकुलों से खूब हंसाया। उन्होंने कहा, हम जिसको सिंदूर लगाते वो अपना हो जाता है, पर मोदी जी की तो आदत है सिंदूर लगाकर छोड़ देते हैं। उन्होंने जहां राहुल गांधी को हास्य कवियों का कुल देवता बता दिया तो अपने व्यग्यों से अपने को भी नहीं बख्शा। अपनी पंक्तियों में उन्होंने गुटखे का प्रचार करने वाले फिल्मी कलाकारों की टांग भी जमकर खींची। मंच पर आसीन काकसगंज के कवि डा. अजय अटल ने मां सरस्वती को समर्पित अपनी रचना सुनाकर सबको प्रभावित किया। हरियाणा के कवि पुनीत पंचाल ने अपनी वीर रस की कविताओं से विद्यार्थियों में खूब जोश भरा। देश के जवानों के लिए भी उन्होंने समर्पित रचना पढ़ी। पंतनगर के मशहूर गज़लकार डा के.पी सिह ने अपनी रचना पढ़ते हुए कहा, चरण मां-बाप के धोकर खुशी से झूम लेता हूं मैं, मुझे मंदिर जाने की जरूरत नहीं पड़ती, मां के चरण अदब से चूम लेता हूं मैं। उन्होंने बेटियों के लिए समर्पित कविता पाठ कर छात्राओं की तालियां लूटीं।

इटावा से आए वीर रस के कवि बृजेंद्र प्रताप ने अपनी ओज भरी रचनाओं से खूब जोश भरा तो अपनी रचनाओं से समाज की समस्याओं पर भी जमकर चोट की। गाजियाबाद से आईं कवियित्री डा. शिखा दीप्ति दीक्षित ने अपनी श्रृगार से ओतप्रोत जब रचना पढ़ी तो विद्यार्थी झूम उठे, उन्होंने कहा कि, इशक की कैसे खुमारी जाएगी, लग रहा है जान हमारी जाएगी, कृष्ण को जब भी बुलाया जाएगा, सिर्फ राधा ही पुकारी जाएगी। दिल्ली के वीर रस के कवि मोहन सिंह निर्भीक ने कहा, व्यक्तित्व बड़ा करके हमको सूरजमल बनना होगा। युवाओं में जोश भरते हुए उन्होंने वीर रस की रचनाएं सुनाईं। मथुरा की उभरती हुई युवा कवियित्री मीरा चौधरी एडवोकेट ने बेटियों को अपनी रचनाओं से अपनी रक्षा स्वयं करने को प्रेरित किया। राष्ट्रवादी ओज कवियित्री चौधरी अंशू छोंकर अवनी ने कहा, नहीं लिखी अपने जीवन के शब्दों की मधुशाला…लिखी शिवाजी की तलवारें और राणा का भाला। उन्होंने संस्कृति विवि के माहौल, विद्यार्थियों के संस्कारों की जमकर तारीफ की। उन्होंने राजनीतिज्ञों को अपनी रचनाओं से खूब पाठ पढ़ाया।

वृंदावन के कवि मोहनलाल मोही ने ब्रज भाषा में हल्के-फुल्के व्यंग्य करती हास्य रजनाओं से खूब गुदगुदाया तो वहीं स्वरचित वंदेमातरम का पाठ कर खूब तालियां बटोरीं। राजस्थान के देवेंद्र राय प्यार भरे मुक्तकों से श्रोताओं की तालियां बटोरीं। उन्होंने कहा, वादों पर अपने प्यार की मोहर लगा गए, यादों के इम्तहान के परचे हमें थमा गए। उन्होंने बेटियों के लिए भी रचनाएं पढ़ीं। गोरखपुर से आए ओम शंकर मिश्रा ने कहा, कोई तुम्हारे लिए क्या खराब मांगेगा, तुम्हारा अपना ही तुमसे जवाब मांगेगा। उनकी रचनाओं में व्यग्य की करारी चोट थी। अंतरराष्ट्रीय ओज एवं भक्ति के कवि गिरीश विद्रोही ने अपनी रचनाओं से जमकर जोश भरा। इस कवि सम्मेल का संचालन अलीगढ़ के कवि शिवम कुमार आजाद ने बड़ी कुशलता के साथ किया और बीच-बीच में अपनी रचनाओं और व्यंग्य बाणों से खूब हंसाया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष मुख्य अतिथि संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। उनके साथ विवि की सीईओ मीनाक्षी शर्मा, प्रति कुलपति डा. रघुराम भट्ट भी रहे। कैप्स के निदेशक डा. रजनीश त्यागी ने सभी अतिथियों का शाल ओढ़ाकर और उपहार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर सारस्वत समाज के ओम प्रकाश सारस्वत पूर्व एनसीसी अधिकारी, ओम प्रकाश सारस्वत पूर्व रेवेन्य इंस्पेक्टर, ओम प्रकाश सारस्वत पूर्व कैप्टन, सुरेश चंद्र सारस्वत ने भी कवियों का जोरदार स्वागत किया और स्मृतिचिह्न प्रदान किए। कार्यक्रम के संचालन में संस्कृति एफएम के आरजे जय शंकर और शिक्षिका शुभ्रा पांडे का भी सहयोग रहा। आयोजन में डा. दुर्गेश वाधवा आदि ने भी अपना सहयोग प्रदान किया।

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