मथुरा 06 फरवरी । केडी मेडिकल कॉलेज के 30 संकाय सदस्यों को योग्यता आधारित चिकित्सा शिक्षा से परिचित कराने, शिक्षण विधियों में सुधार करने तथा मूल्यांकन तकनीकों को बढ़ाने आदि पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की आब्जर्वर प्रो. (डॉ.) पूनम लाम्बा की देखरेख में के.डी. मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ प्राध्यापकों ने प्रशिक्षु सदस्यों को बेसिक कोर्स इन मेडिकल एज्यूकेशन पर विस्तार से जानकारी दी। केडी मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के चेयरमैन मनोज अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में ऐसी कार्यशालाएं बहुत उपयोगी हैं। श्री अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को मेडिकल शिक्षा में हो रहे परिवर्तनों की जानकारी दिलाया जाना बहुत जरूरी है। प्राचार्य और डीन डॉ. आर.के. अशोका ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के चिकित्सा शिक्षा में किए जा रहे सुधार कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस तीन-दिवसीय वर्कशॉप का मकसद फैकल्टी मेम्बर्स को नेशनल मेडिकल कमीशन के रिवाइज्ड कॉम्पिटेंसी-बेस्ड मेडिकल एज्यूकेशन करिकुलम के बारे में जागरूक करना और नए करिकुलम फ्रेमवर्क के तहत फैकल्टी को प्रभावी फैसिलिटेटर के तौर पर तैयार करना था। बीसीएमई के समन्वयक डॉ. अमित कुमार जैन ने बताया कि यह कार्यशाला राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के दिशा-निर्देशों तथा मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। आब्जर्वर प्रो. (डॉ.) पूनम लाम्बा की देखरेख में विषय विशेषज्ञों ने 30 प्रशिक्षु संकाय सदस्यों को चिकित्सा शिक्षा में बुनियादी पाठ्यक्रम की अवधारणा पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. जैन ने बताया कि बीसीएमई कार्यशाला में प्रतिभागियों को सीखने की प्रक्रिया, सीखने के डोमेन और सीखने के सिद्धांतों की जानकारी देने के साथ ही योग्यता आधारित चिकित्सा शिक्षा ढांचे के भीतरी लक्ष्यों, भूमिकाओं और दक्षताओं से भी अवगत कराया गया। इतना ही नहीं कार्यशाला में प्रतिभागियों ने विभिन्न शिक्षण-अधिगम विधियों पर भी विचार-विमर्श किया, जिसमें इंटरेक्टिव और छोटी समूह विधियां शामिल थीं। कार्यशाला में मूल्यांकन सिद्धांतों को भी शामिल किया गया, जिसमें आंतरिक मूल्यांकन और रचनात्मक मूल्यांकन पर विशेष ध्यान दिया गया । विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं में सीखने के परिणामों को बढ़ाने में प्रभावी प्रतिक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में प्रतिभागियों के लिए एक ठोस आधार तैयार किया गया, उन्हें समूह की गतिशीलता, सीखने के सिद्धांतों और मूल्यांकन रणनीतियों की व्यापक समझ दी गई। कार्यशाला में प्रतिभागियों को शिक्षण और मूल्यांकन कौशल में सुधार की गूढ़ बातें भी बताई गईं। प्रशिक्षु संकाय सदस्यों ने पाठ योजनाएं विकसित करने, मूल्यांकन डिजाइन तथा स्व-निर्देशित शिक्षण और मार्गदर्शन तकनीकों के उपयोग की जानकारी भी हासिल की। कार्यशाला में के.डी. मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा शिक्षा समिति के समन्वयक प्रो. (डॉ.) अमित कुमार जैन, प्रो. (डॉ.) वी.पी. पांडेय, प्रो. (डॉ.) मंजू पाण्डेय, प्रो. (डॉ.) विक्रम शर्मा, प्रो. (डॉ.) अम्बरीश कुमार, प्रो. (डॉ.) शिखा अग्रवाल, प्रो. (डॉ.) आशुतोष कुमार सिंह, प्रो. (डॉ.) अमनजोत कौर चौहान, प्रो. (डॉ.) राहुल गोयल, प्रो. (डॉ.) जी. कांधा कुमारी, प्रो. (डॉ.) पवन फुताने, डॉ. वंदना बाथम, डॉ. वरुणा गुप्ता, प्रो. (डॉ.) अनुज बंसल, प्रो. (डॉ.) प्रणीता सिंह आदि ने विभिन्न विषयों में अपने-अपने अनुभव साझा किए।
















