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लखनऊ 29 जनवरी । उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को और पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि अब संपत्ति पंजीकरण में आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य होगा।मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 28 अगस्त 2025 को हुई स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक में छद्म व्यक्तियों द्वारा की जाने वाली फर्जी रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में आवश्यक अधिसूचनाएं जारी कर दी गई हैं। 2 अगस्त 2024 की अधिसूचना के माध्यम से रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 69 के अंतर्गत ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2024 लागू की गई। इसके तहत आधार धारकों की पहचान ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और ई-हस्ताक्षर के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में सत्यापित की जाएगी। मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि यह व्यवस्था 1 फरवरी 2026 से प्रदेश के सभी उप निबंधक कार्यालयों में लागू कर दी जाएगी। सभी कार्यालयों को इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से फर्जी रजिस्ट्री और छद्म व्यक्तियों के द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगेगी। संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। भूमि और अचल संपत्ति से जुड़े फर्जीवाड़े, कूटरचित दस्तावेज और विवादों में कमी आएगी। डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था मजबूत होगी और विधिक विवाद एवं न्यायालयीन वादों में कमी आएगी। नागरिकों के संपत्ति अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित होगा। मंत्री ने कहा कि यह कदम राज्य सरकार के डिजिटल गवर्नेंस लक्ष्यों के अनुरूप है और इसे लागू करने से सम्पूर्ण पंजीकरण प्रणाली में आधुनिक तकनीकी सुविधाओं का समावेश होगा।

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