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मथुरा 29 जनवरी । जी.एल. बजाज ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा में इस समय देश-विदेश के विशेषज्ञ विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आधुनिक गणितीय विधियों और उच्च-प्रदर्शन कम्प्यूटिंग पर अपने-अपने अनुभव और शोध-पत्र साझा कर रहे हैं। पांचवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ मुख्य अतिथि प्रो. एस.के. काक (पूर्व कुलपति, सीसीएस विश्वविद्यालय एवं महामाया तकनीकी विश्वविद्यालय, नोएडा) तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. यारोस्लाव डी. सर्गेयेव (यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलाब्रिया, इटली) द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने अतिथियों तथा सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. वी.के. सिंह ने सभी प्रतिनिधियों को पटका, पौध एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर स्वागत किया। अपने उद्घाटन सम्बोधन में प्रो. एस.के. काक ने आधुनिक गणित एवं उसके सहायक उपकरणों के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि कम्प्यूटिंग और क्वांटम तकनीक के विकास में प्राचीन भारतीय गणित की सुदृढ़ नींव अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है, जिससे मानव कल्याण को व्यापक लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि क्वांटम विज्ञान में भारत की भागीदारी 20वीं शताब्दी के आरम्भ से ही है। सत्येंद्र नाथ बोस के 1924 में प्रकाशित क्वांटम सांख्यिकी पर शोध-पत्र ने बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी की नींव रखी, जो क्वांटम यांत्रिकी का एक मूलभूत सिद्धांत है। इसके बाद के दशकों में भारतीय भौतिकविदों ने सैद्धांतिक प्रगति तो की  लेकिन क्वांटम प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं विकास के लिए समर्पित बुनियादी ढांचे ने अब आकार लिया है।

संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने सम्मेलन में पधारे सभी प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नवाचार एवं अत्याधुनिक तकनीकों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटिंग और संचार विश्व में हो रहे सभी विकास कार्यों की रीढ़ हैं, जो मानवता के सर्वांगीण विकास और जीवन-स्तर में सुधार का आधार बनते हैं। प्रो. वी.के. सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि ज्ञान की खोज सदैव मानव प्रगति का केंद्र रही है। “योगः कर्मसु कौशलम्” अर्थात कर्म में उत्कृष्टता ही सच्चा ज्ञान है। यह विचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आधुनिक गणितीय विधियों और उच्च-प्रदर्शन कम्प्यूटिंग-2026 की भावना को सशक्त रूप से प्रतिबिम्बित करता है, जहां गणितीय संगणन तकनीकें और हाई-परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की जटिल चुनौतियों के समाधान हेतु एकत्रित होती हैं।

इस अवसर पर टीयू ड्रेसडेन, जर्मनी के प्रो. आंद्रेयास फिशर ने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग में पैकिंग समस्याओं के अनुप्रयोगों पर अपने विचार साझा किए। आईबीएम इंडिया रिसर्च लैब के रिसर्च साइंटिस्ट ऋताजित मजूमदार ने क्वांटम-सेंट्रिक सुपरकम्प्यूटर के सटीक समाधानों से परे विकरणीकरण विषय पर व्याख्यान दिया। श्री मजूमदार ने आईबीएम द्वारा विकसित क्वांटम कम्प्यूटर और उसके वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला। जापान की यूनिवर्सिटी ऑफ़ त्सुकुबा के प्रो. डाइसुके ताकाहाशी ने जीपीयू क्लस्टर्स पर 2-डी डीकम्पोज़िशन के साथ पैरेलल 3-डी एफएफटी के कार्यान्वयन पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। सम्मेलन में देश-विदेश के शोधार्थियों एवं प्रतिष्ठित शिक्षकों ने अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए, जिससे प्रतिभागियों को वर्तमान परिदृश्य में हो रहे नवीनतम शोध एवं विकास की व्यापक जानकारी प्राप्त हुई। संस्थान के सभी संकाय सदस्यों ने तकनीकी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का साक्षी बनकर गणित एवं कम्प्यूटिंग की दुनिया में उपयोगी अंतर्दृष्टि प्राप्त की। इस तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन का संचालन शिखा गोविल, डॉ. शाम्भवी कात्यायन एवं खुशबू सिंह ने किया। यह सम्मेलन सचिव प्रो. नवनीत कुमार पांडेय, सम्मेलन संयोजक डॉ. अभिषेक कुमार सिंह तथा तकनीकी प्रमुख डॉ. राजीव कुमार सिंह के मार्गदर्शन में सभी के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।

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