सिकंदराराऊ (हसायन) 23 जनवरी । कस्बा एवं देहात क्षेत्र में वन विभाग द्वारा सुगंधित वन उपज घास ‘गाडर की जड़’ के अवैध परिवहन को लेकर की गई कार्रवाई के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। खस का इत्र बनाने में उपयोग होने वाली गाडर की जड़ से भरा एक चार पहिया लोडर वाहन वन विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों ने पुरदिलनगर मार्ग पर पकड़ लिया, लेकिन बाद में बिना किसी ठोस कार्रवाई के वाहन को छोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि शीतकालीन मौसम में कस्बा व देहात क्षेत्र में संचालित इत्र उद्योगों द्वारा खस इत्र निकालने के लिए गाडर की जड़ की भारी मांग रहती है। इसी के चलते इत्र कारोबारी चार पहिया एवं छह पहिया वाहनों के माध्यम से बिना वन विभाग की अनुमति के इस सुगंधित वन उपज का चोरी-छिपे परिवहन कर रहे हैं। वाहनों को तिरपाल व काली पॉलीथिन से ढककर लाया जा रहा है। हसायन क्षेत्र के सिकंद्राराऊ–जलेसर रोड स्थित कस्बा पुरदिलनगर मुख्य मार्ग से गुजर रहे एक संदिग्ध चार पहिया लोडर वाहन को वन विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों ने रोककर जांच की, जिसमें गाडर की जड़ बरामद हुई। वाहन पकड़े जाने की सूचना से क्षेत्रीय इत्र कारोबारियों में हड़कंप मच गया। सूत्रों के अनुसार, बाद में एक क्षेत्रीय महिला जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि एवं इत्र व्यापारी की सिफारिश के बाद जुर्माना रसीद कटवाने की बात कहकर वाहन को बिना किसी बड़ी कार्रवाई के ही छोड़ दिया गया।
जबकि वन विभाग के नियमों के अनुसार बिना अनुमति सुगंधित वन उपज के परिवहन पर प्रति वाहन 25 से 30 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ कर्मचारी वाहनों को पकड़ने के बाद प्रभावशाली लोगों का नाम लेकर बिना कार्रवाई के छोड़ देते हैं, जिससे विभाग को प्रतिदिन लाखों रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो रहा है। पुरदिलनगर मार्ग पर इस तरह की घटनाओं को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व इसी मार्ग पर गाडर की जड़ से भरे चार वाहनों पर वन विभाग द्वारा जुर्माना भी लगाया गया था। बावजूद इसके अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। इस संबंध में क्षेत्रीय वन उपनिरीक्षक (वन दरोगा) अलीहसन ने बताया कि गाडर की जड़ से भरा एक वाहन कर्मचारियों द्वारा पकड़ा गया था। उस समय वे स्वयं मौके पर मौजूद नहीं थे। एक क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि द्वारा फोन किए जाने पर वाहन को छोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ दिन पूर्व इसी इत्र व्यापारी के वाहन पर जुर्माना किया जा चुका था, इसी कारण इस बार वाहन को छोड़ा गया। वन विभाग द्वारा अवैध खस कारोबार को लेकर सक्रियता दिखाने के बावजूद कड़ी कार्रवाई न होने से विभागीय मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।














