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आगरा 21 जनवरी । शारदा यूनिवर्सिटी आगरा के आनंद स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एएसईटी) द्वारा बुधवार को “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एआई-ड्रिवन इंटेलिजेंट सिस्टम्स फॉर सस्टेनेबिलिटी (आईसीएआईडीआईएसएस 2026)” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन किया गया। कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से आए शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों ने एआई आधारित तकनीकों के माध्यम से सतत विकास पर गहन मंथन किया।

कॉन्फ्रेंस में गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में उपस्थित प्रो. (डॉ.) सुब्रहम खरे ने कहा कि हायर एजुकेशन में एआई का उपयोग रिसर्च की गुणवत्ता को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने इंटर-डिसिप्लिनरी रिसर्च को समय की मांग बताते हुए विद्यार्थियों से इनोवेशन आधारित सोच विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी तभी सार्थक है जब उसका उपयोग ह्यूमन वेलफेयर के लिए हो। डॉ. हीराम रज़ा खान ने अपने संबोधन में कहा कि मशीन लर्निंग और डेटा साइंस आने वाले समय में हर फील्ड की आवश्यकता बनेंगे। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए टेक्निकल रिसर्च को प्रैक्टिकल लेवल पर उतारना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को ग्लोबल चैलेंजेज के समाधान के लिए रिसर्च से जुड़ने की प्रेरणा दी। डॉ. सुरेन्द्र एम. जैन ने कहा कि एआई आधारित स्मार्ट सिस्टम्स डेवलपमेंट की गति को तेज करने में सक्षम हैं। उन्होंने एथिकल और रिस्पॉन्सिबल एआई पर जोर देते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी का उपयोग सोसाइटी और एनवायरनमेंट के संतुलन को बनाए रखते हुए किया जाना चाहिए। उनके विचारों को श्रोताओं ने विशेष रूप से सराहा। डॉ. परवीन सैनी ने अपने वक्तव्य में कहा कि एकेडमिक रिसर्च तभी प्रभावी मानी जाएगी जब उसे इंडस्ट्री और सोसाइटी से जोड़ा जाए। उन्होंने स्टूडेंट्स को इनोवेशन, स्टार्ट-अप और एंटरप्रेन्योरशिप की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने ऐसी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस को यंग रिसर्चर्स के लिए उपयोगी प्लेटफॉर्म बताया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. के. गुणराज ने अपने संबोधन में कहा कि इंटरनेशनल लेवल पर रिसर्च को पहचान दिलाने के लिए क्वालिटी और ओरिजिनैलिटी सबसे अहम है। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से पेटेंट ओरिएंटेड रिसर्च की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी आधारित इनोवेशन से ही सस्टेनेबल फ्यूचर संभव है। विशिष्ट अतिथि डॉ. अनादी श्रीनिवासुलु ने कहा कि इंटरनेशनल कोलैबोरेशन से रिसर्च को नई ऊंचाइयां मिलती हैं। उन्होंने युवा शोधार्थियों को ग्लोबल नेटवर्किंग, पब्लिकेशन और इनोवेशन पर फोकस करने की सलाह दी। उन्होंने ऐसे अकादमिक मंचों को ज्ञान-विनिमय का सशक्त माध्यम बताया। इस अवसर पर शारदा यूनिवर्सिटी आगरा की माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) जयन्ती रंजन ने अपने प्रभावशाली संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फ्यूचर टेक्नोलॉजी ही नहीं बल्कि ह्यूमैनिटी के सस्टेनेबल फ्यूचर का मजबूत आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से सोसाइटी और एनवायरनमेंट की समस्याओं के समाधान के लिए एआई आधारित टेक्नोलॉजी विकसित करने का आह्वान किया।

इसके पश्चात शारदा यूनिवर्सिटी आगरा के आनंद स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एएसईटी) के डीन प्रो. स्वामीनाथन ने अपने संबोधन में कहा कि एएसईटी रिसर्च और इनोवेशन को निरंतर बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि आईसीएआईडीआईएसएस 2026 जैसी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स को ग्लोबल प्लेटफॉर्म प्रदान करती हैं। उन्होंने भविष्य में और अधिक उच्चस्तरीय अकादमिक आयोजनों के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। अंत में कॉन्फ्रेंस के चीफ गेस्ट डॉ. मनीष कुमार चाटली, डायरेक्टर, आईसीएआर-सीआईआरजी, मखदूम ने कहा कि एआई आधारित इंटेलिजेंट सिस्टम्स एग्रीकल्चर, एनिमल हसबेंड्री और एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन के क्षेत्र में रिवोल्यूशनरी बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने कहा कि डेटा बेस्ड डिसीजन सिस्टम सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस से सोसाइटी-ओरिएंटेड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पर फोकस करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर कॉन्फ्रेंस में पधारे सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति कॉन्फ्रेंस के कन्वीनर प्रो. मनीष बाबू अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन एवं सहयोग से कॉन्फ्रेंस अत्यंत सफल रही।

 

 

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