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हाथरस 18 जनवरी । प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आदि संस्थापक ब्रह्मा बाबा का 57वां पुण्य स्मृति दिवस विश्व शांति दिवस के रूप में ब्रह्माकुमारीज के अलीगढ़ रोड स्थित शांति भवन सहज राजयोग प्रशिक्षण केंद्र पर अत्यंत शालीनता, श्रद्धा और शांति के वातावरण में मनाया गया। प्रातः काल से ही जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से ब्रह्मा वत्सों का आगमन प्रारंभ हो गया। कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग छह घंटे की ध्यान योग साधना के उपरांत श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें अनेक गणमान्य व्यक्तियों एवं ब्रह्माकुमारी बहनों ने ब्रह्मा बाबा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि समारोह में निस्वार्थ सेवा संस्थान के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल, ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष एवं पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, आशु कवि अनिल बोहरे, मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजकुमार वाजपेई (सपत्नीक), दोहाकार प्रभु दयाल दीक्षित, पूर्व सैनिक रमेश दीक्षित, महिपाल सिंह एवं उनके साथी, आनंदपुरी केंद्र संचालिका बीके शांता बहन, इगलास केंद्र संचालिका बीके हेमलता बहन, रामपुर केंद्र संचालिका बीके मीना बहन, बीके नीतू बहन, बीके श्वेता बहन, बीके कोमल बहन, बीके उमा बहन, बीके दुर्गेश बहन सहित अनेक ब्रह्मा कुमार-कुमारियां उपस्थित रहीं।

इस अवसर पर ब्रह्मा बाबा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बीके शांता बहन ने कहा कि ब्रह्मा बाबा को प्रारंभ में संसार परिवर्तन, महाविनाश तथा भारत एवं विश्व के पुनः सतयुगमय बनने के दिव्य साक्षात्कार हुए। परमपिता परमात्मा शिव की प्रेरणा से उन्होंने अपने व्यापारिक जीवन का त्याग कर मातृशक्ति आधारित ट्रस्ट की स्थापना की, जिसका संचालन पूर्णतः माताओं-बहनों द्वारा किया गया। यह विश्व का पहला ऐसा आध्यात्मिक संगठन बना। उन्होंने बताया कि भारत-पाक विभाजन के बाद यह संगठन राजस्थान की अरावली पर्वतमाला में स्थापित हुआ और वर्ष 1936-37 में रोपा गया यह छोटा पौधा आज विशाल वटवृक्ष बनकर विश्वभर में अपने 21 प्रभागों के माध्यम से आध्यात्मिक एवं सामाजिक सेवाएं दे रहा है। निस्वार्थ सेवा संस्थान के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने कहा कि यहां उन्हें अपार शांति और पवित्रता की अनुभूति हो रही है। यह संगठन मातृत्व भाव पर आधारित है, क्योंकि केवल मां ही दुख-दर्द को समझकर इतने विशाल संगठन का कुशल संचालन कर सकती है।

कार्यक्रम में कवि प्रभु दयाल दीक्षित ने अपने दोहों से आध्यात्मिक एवं वैराग्यपूर्ण वातावरण निर्मित किया, जबकि आशु कवि अनिल बोहरे ने तात्कालिक कविता पाठ से सभी को भावविभोर कर दिया। ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने कहा कि ब्रह्मा बाबा को श्रद्धांजलि देने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ब्रह्मा तो सदा थे, हैं और रहेंगे। भारत को पुनः सतयुगमय बनाने के उनके दिव्य संकल्प में सभी को तन-मन-धन से सहयोग करना चाहिए। बीके हेमलता बहन ने कहा कि ब्रह्मा बाबा ने त्याग, तपस्या और सेवा के माध्यम से जन-जन के मन में दैवी गुणों का बीजारोपण किया। इस अवसर पर जनपद की विभिन्न गीता पाठशालाओं से आए ब्रह्मा कुमार एवं ब्रह्माकुमारियां बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम शांतिपूर्ण, गरिमामय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

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