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हाथरस 09 जनवरी । बलकेश्वर महादेव, सरक्यूलर रोड पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सप्तम दिवस पर कथा व्यास रसराज दास जी महाराज ने सुदामा चरित्र के माध्यम से सच्ची मित्रता, भक्ति और विनम्रता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। कथा में बताया गया कि सुदामा एक अत्यंत गरीब ब्राह्मण थे। उनके पास न तो खाने के लिए पर्याप्त भोजन था और न ही तन ढकने के लिए अच्छे वस्त्र। उनकी पत्नी और बच्चे गरीबी से त्रस्त थे।

सुदामा की पत्नी के आग्रह पर वे अपने बालसखा, द्वारिका के राजा श्रीकृष्ण, से मिलने का निश्चय करते हैं। थोडे से चावल लेकर सुदामा द्वारिका पहुँचे। उनकी दीन-हीन हालत देखकर द्वारपाल भी हैरान रह गए। श्रीकृष्ण ने अपने मित्र को देखते ही सब काम छोड़कर दौड़ते हुए अपने आँसुओं से सुदामा के पैर धोए, जिससे उनकी गहरी मित्रता और प्रेम प्रकट हुआ। जब सुदामा संकोचवश चावल की पोटली नहीं दे पाए, तो कृष्ण स्वयं वह पोटली छीनकर खा गए और कहा, “तुम चोरी करने में निपुण हो।”

कथा में बताया गया कि सुदामा बिना कुछ माँगे ही अपने गाँव लौट जाते हैं। घर पहुँचने पर वे अपनी झोपड़ी की जगह आलीशान महल और सम्पत्ति देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं। कथा का संदेश यह है कि सच्चा धन भौतिक नहीं, बल्कि प्रेम, मित्रता और भक्ति में है। साथ ही कथा व्यास ने उपस्थित जनों को सतर्क रहने और समाज में जागरूकता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं की जनसंख्या घट रही है, विधर्मियों की जनसंख्या बढ़ रही है और महिलाओं के खिलाफ विभिन्न षड्यंत्र चल रहे हैं, इसलिए सतर्क रहना आवश्यक है। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों में प्रेमचंद वर्मा, किशोरीरमन वर्मा, प्रवीन वार्ष्णेय, राधारमण वर्मा, राजू लाला, ओमप्रकाश वर्मा, राजकुमार वर्मा, महेश वर्मा, दिलीप वर्मा, बिंटू वर्मा, श्रीनाथ, अमित, बिपिन, विशाल, तरुण, अंकित, अरुण, गोपाल, राम वर्मा, टिंकू वर्मा, योगेश वर्मा, दाऊजी वर्मा, सचिन वर्मा, दाऊदयाल वर्मा, कृष्णा, बिपिन कांत, मनोज वार्ष्णेय, प्रवीण वार्ष्णेय, अमरप्रकाश वार्ष्णेय, राजू वार्ष्णेय, अरुण अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, चिराग, गुड्डा, मुकेश शर्मा, अमन ब।गला, अंशु वर्मा, मनोज वर्मा, कान्हा, सुमित कुलवाल आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कथा के माध्यम से सिखाया गया कि भक्ति, मित्रता और प्रेम ही सच्चे धन का स्रोत हैं और व्यक्ति को हमेशा सादगी और निष्ठा के मार्ग पर चलना चाहिए।

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