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लखनऊ 07 जनवरी । उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को प्रदेश सरकार ने निरस्त कर दिया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर लिया गया है। मामला उस समय प्रकाश में आया जब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPPSC) की तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय के गोपनीय सहायक महबूब अली द्वारा पेपर लीक करने की सूचना मिली। एसटीएफ की जांच में यह पुष्टि हुई कि परीक्षा की शुचिता भंग हुई है। आयोग ने यह परीक्षा 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित की थी। इसके बाद 20 अप्रैल को यूपी एसटीएफ ने गोंडा के लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के सहायक प्रोफेसर बैजनाथ पाल, उनके भाई विनय कुमार और अयोध्या निवासी महबूब अली को गिरफ्तार किया। महबूब अली तत्कालीन आयोग की अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था।

जांच में यह भी सामने आया कि अभियुक्तों ने परीक्षा के प्रश्न पत्रों को लाखों रुपये में बेचने की कोशिश की। एसटीएफ ने महबूब अली के पास से डाटा और मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाई और आयोग के डाटा से मिलान कराया, जिसमें पुष्टि हुई कि परीक्षा की पारदर्शिता और शुचिता गंभीर रूप से भंग हुई है। महबूब अली ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्र निकाल लिए थे और इन्हें अभ्यर्थियों को पैसे लेकर उपलब्ध कराया। इसकी पुष्टि एसटीएफ द्वारा गहन डेटा विश्लेषण और जांच के दौरान हुई। इस प्रकरण में तत्कालीन आयोग की अध्यक्ष से त्यागपत्र लिया जा चुका है। एसटीएफ ने इस मामले में थाना विभूतिखंड, जनपद लखनऊ पर मु.अ.सं. 144/25, धारा 112, 308(5), 318(4) बी.एन.एस., 2023 के तहत अभियोग पंजीकृत किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोग को निर्देश दिए हैं कि परीक्षा का आयोजन शीघ्रातिशीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी गड़बड़ी को रोका जा सके।

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