
मथुरा 07 जनवरी । हम अपनी रुचि, क्षमता और आंतरिक प्रेरणा को पहचान कर यदि आगे बढ़ें तो सफलता निश्चित है। किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि वह स्वयं को कितनी गहराई से जानता है तथा वह किन कार्यों में स्वाभाविक रूप से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। सच कहें तो हम अपनी क्षमता को पहचान कर ही अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। यह बातें राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, मथुरा के बीबीए छात्र-छात्राओं को मोटिवेशनल स्पीकर त्रिभुवन दास ने बताईं। यूनिवर्सिटी ऑफ बेनिन (वेस्ट अफ्रीका) से सम्बद्ध त्रिभुवन दास ने छात्र-छात्राओं को “मैं कौन हूँ: अपने उद्देश्य की खोज यात्रा” विषय पर आत्म-चिंतन, आत्म-अन्वेषण और जीवन के उद्देश्य को समझने की दिशा में गम्भीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्म-चिंतन का महत्व समझाते हुए कहा कि जब तक हम अपनी रुचियों, क्षमताओं और आंतरिक प्रेरणा को नहीं पहचानेंगे तब तक सही दिशा में आगे बढ़ना कठिन होगा। उन्होंने एनर्जी मैपिंग की अवधारणा को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया और बताया कि हर व्यक्ति को यह पहचानना चाहिए कि कौन-सी गतिविधियां उसे ऊर्जावान बनाती हैं और कौन-सी उसे थका देती हैं।
मोटिवेशनल स्पीकर त्रिभुवन दास ने छात्र-छात्राओं को नई चीज़ें आजमाने, प्रश्न पूछने और निरंतर जिज्ञासु बने रहने को प्रेरित किया ताकि वे स्वयं को बेहतर तरीके से समझ सकें। इसके बाद उन्होंने उद्देश्य की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता या रुचि तक सीमित नहीं होता बल्कि इसमें स्वयं से बड़े लक्ष्य के लिए योगदान देना भी शामिल होता है। उन्होंने परिवार, समाज और व्यक्तिगत विकास जैसे मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब व्यक्ति अपने मूल्यों के अनुरूप कार्य करता है, तो उसका जीवन अधिक अर्थपूर्ण बनता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे सकता है और यही योगदान जीवन को दिशा देता है। अपने व्याख्यान में उन्होंने कार्य, अनुशासन और निरंतर विकास के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर जोखिम लेने, गलतियों से सीखने और असफलताओं को नकारात्मक रूप में न देखकर फीडबैक के रूप में स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही उन्होंने अच्छी आदतों, सकारात्मक सोच और नियमित दिनचर्या को व्यक्तिगत विकास का आधार बताया।
त्रिभुवन दास ने सकारात्मक लोगों के साथ रहने, सकारात्मक आत्म-वार्ता करने और आवश्यकता पड़ने पर मेंटर या मार्गदर्शक की सहायता लेने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि अपने उद्देश्य की खोज कोई एक दिन में पूरी होने वाली प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह जीवन भर चलने वाली यात्रा है, जिसमें जिज्ञासा, धैर्य और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। राजीव एकेडमी के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट प्रमुख डॉ. विकास जैन ने कहा कि ऐसे गेस्ट लेक्चर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आत्म-अन्वेषण और उद्देश्य बोध जैसे विषय विद्यार्थियों को न केवल बेहतर करियर चुनने में मदद करते हैं बल्कि उन्हें जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक भी बनाते हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. अभिषेक सिंह भदौरिया ने कहा कि ऐसे प्रेरणादायी सत्र विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, स्पष्टता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करते हैं, जो उनके भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। अंत में डॉ. भदौरिया ने अतिथि वक्ता को उनके बहुमूल्य समय और प्रेरणादायी विचारों के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि अतिथि वक्ता द्वारा साझा किए गए अनुभव और विचार विद्यार्थियों को स्वयं को समझने, अपने उद्देश्य की पहचान करने तथा जीवन में सकारात्मक दिशा तय करने में सहायक सिद्ध होंगे।




















