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लखनऊ 06 जनवरी । उत्तर प्रदेश कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में 13 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सबसे बड़ा फैसला पारिवारिक संपत्ति पर स्टांप ड्यूटी में राहत देने का लिया गया। अब परिवार के सदस्यों के नाम पर व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों के दान पर केवल 5,000 रुपये स्टांप ड्यूटी और 1 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। इससे पहले यह सुविधा केवल कृषि और आवासीय संपत्तियों तक सीमित थी। इसका उद्देश्य संपत्ति हस्तांतरण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और कम खर्चीला बनाना है। कैबिनेट ने प्रदेश के औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सेमीकंडक्टर सेक्टर में 3,000 करोड़ या उससे अधिक निवेश पर विशेष प्रोत्साहन देने का निर्णय भी लिया। इस प्रोत्साहन के तहत ब्याज सब्सिडी, कर्मचारी लागत प्रतिपूर्ति, 10 वर्षों तक नेट एसजीएसटी में छूट, ईपीएफ प्रतिपूर्ति, बिजली और जल शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। यह कदम यूपी को सेमीकंडक्टर निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। इसके साथ ही कैबिनेट ने प्रदेश में वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति-2024 की नियमावली को मंजूरी दी। इसके तहत इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी बनाया गया है और जीसीसी इकाइयों को वित्तीय प्रोत्साहन, तकनीकी सहायता, उद्योग लिंकिंग और त्वरित अनुमोदन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इसका उद्देश्य प्रदेश में उच्च स्तरीय सेवाओं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है।

शिक्षा क्षेत्र में कैबिनेट ने जेएस विश्वविद्यालय शिकोहाबाद, फिरोजाबाद की मान्यता रद्द कर दी। विश्वविद्यालय द्वारा बीपीएड पाठ्यक्रम में फर्जी अंकतालिका और डिग्री जारी करने का मामला सामने आया था। अब विश्वविद्यालय के अभिलेख डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रखे जाएंगे और अंतरिम समिति के माध्यम से संचालन सुनिश्चित किया जाएगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में कैबिनेट ने वाराणसी में 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने का निर्णय लिया। इसके लिए श्री शिव प्रसाद गुप्ता मंडलीय अस्पताल परिसर में पुराने और निष्प्रयोज्य भवनों को ध्वस्त किया जाएगा। यह अस्पताल 315 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा, जिसमें 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकार का योगदान होगा। इस अस्पताल से न सिर्फ वाराणसी बल्कि पूर्वांचल के मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा, कैबिनेट ने पैतृक संपत्ति के बंटवारे के नियमों में बदलाव किया है। अब पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री केवल 10,000 रुपये (5,000 स्टांप ड्यूटी + 5,000 निबंधन शुल्क) में कराई जा सकेगी। यह सुविधा कृषि, आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों पर लागू होगी और तीन पीढ़ियों तक पारंपरिक वंशजों के बीच लागू होगी। इन सभी फैसलों से न केवल संपत्ति और औद्योगिक निवेश आसान होंगे, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में भी प्रदेश को मजबूती मिलेगी।

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