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मथुरा 30 नवंबर । संस्कृति विश्वविद्यालय में श्री अरविंद के आलोक में वेदों के अनुप्रयोगों के विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी रविवार को सहयोगियों के सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन के साथ सम्पन्न हुई। संगोष्ठी का समापन संतोष मेमोरियल ऑडिटोरियम में हुआ, जहां संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता ने आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। समापन सत्र में एसवीवाईएएसए यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर एवं वेद विज्ञान शोध संस्थान के चेयरमैन प्रो. रामचंद्र भट मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता ने की। इस अवसर पर श्री अरबिंदो सोसाइटी कर्नाटक के चेयरमैन डॉ. अजीत सबनीस, साक्षी ट्रस्ट बेंगलुरु के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. आरवी जहांगीरदार, बिंदु माधव एवं संस्कृति विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. एम. बी. चेट्टी भी मौजूद रहे। मुख्य अतिथि डॉ. रामचंद्र भट ने “वेद को कैसे समझें, वेद सिद्धांतों का जीवन में उपयोग और श्री अरबिंदो की वेद पर दृष्टि” पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वेद केवल प्राचीन मंत्रों का संग्रह नहीं, बल्कि मानव विकास और आंतरिक जागृति का गहरा मार्गदर्शन हैं। वाइस चांसलर डॉ. एम. बी. चेट्टी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह संगोष्ठी वैदिक ज्ञान की प्रासंगिकता को समझने और आधुनिक समाज में इसके समन्वय की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि श्री अरविंद के अनुसार वेद ‘समग्र जीवन दर्शन’ का मार्गदर्शक हैं। डॉ. आरवी जहाँगीरदार ने संगोष्ठी में शामिल 17 विशेषज्ञ वक्ताओं के विचारों एवं चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया। वहीं, कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता ने युवाओं से वेदों के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इस सम्मेलन से छात्रों को सीखने और समझने का बड़ा अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि ‘लिविंग वेद’ केवल संगोष्ठी नहीं बल्कि वैदिक ज्ञान को आधुनिक युग में प्रासंगिक बनाने का एक सशक्त आंदोलन है। संस्कृति विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। डॉ. अजीत सबनीस ने श्री अरबिंदो के विचारों व दर्शन से अपने जुड़ाव का अनुभव साझा किया और कहा कि वैदिक ज्ञान युवा पीढ़ी को निर्णय क्षमता, रचनात्मकता, स्वास्थ्य और चरित्र निर्माण में मजबूत बना सकता है। उन्होंने सम्मेलन की उत्कृष्ट व्यवस्था के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। समापन अवसर पर सम्मेलन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सहयोगियों में विवेक श्रीवास्तव, विजय सक्सेना, दिलीप सिंह, डॉ. रेणु गुप्ता, ज्योति यादव, जय शंकर पांडे, राहुल, सुधांशु शाह सहित अन्य को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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