हाथरस/सासनी 11 अक्टूबर। थाना सासनी क्षेत्र स्थित दामिनी हॉस्पिटल में इलाज और ऑपरेशन के दौरान प्रसूता प्रीति देवी पत्नी अजीत कुमार, निवासी वीरनगर की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। घटना 10 अक्टूबर की बताई जा रही है। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की। मामले में थाना सासनी पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद वे शिकायत लेकर थाना सासनी पहुंचे और थाना प्रभारी को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन उनकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। परिजनों ने पुलिस पर उनके साथ अनुचित व्यवहार करने का भी आरोप लगाया। इससे नाराज ग्रामीणों ने मृतका के शव को थाने के सामने रखकर प्रदर्शन करने की तैयारी शुरू कर दी, जिसके बाद मामला तूल पकड़ने लगा। मामले की जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के प्रतिनिधि संजय नायक को दी गई। सूचना मिलने पर संजय नायक हाथरस पहुंचे और परिजनों से बातचीत कर मामले की जानकारी ली। उन्होंने विधिक सलाह के लिए अधिवक्ता डॉ. पार्थ गौतम से भी संपर्क किया। इसके बाद संजय नायक ने पुलिस अधीक्षक हाथरस, डीआईजी अलीगढ़ और एडीजी आगरा जोन से फोन पर संपर्क कर मामले तथा थाना पुलिस के कथित व्यवहार की शिकायत की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित पक्ष की तहरीर को 11 अक्टूबर 2026 को जनरल डायरी (जीडी संख्या 039) में दर्ज किया गया और उसकी हस्ताक्षरित प्रति परिजनों को उपलब्ध कराई गई। हालांकि, जीडी में शिकायत दर्ज होना अपने आप में प्राथमिकी दर्ज होने या आरोपों की पुष्टि होने के समान नहीं है। इसके बाद संजय नायक और अधिवक्ता डॉ. पार्थ गौतम ने परिजनों एवं ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और कानून के दायरे में रहकर न्याय की मांग करने की अपील की। संजय नायक ने आश्वासन दिया कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो इसे पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। समझाने-बुझाने के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रस्तावित प्रदर्शन स्थगित कर दिया। फिलहाल, मामले में अस्पताल प्रबंधन और पुलिस की ओर से आधिकारिक पक्ष सामने आने तथा प्रसूता की मौत के कारणों की जांच से संबंधित जानकारी की प्रतीक्षा है।










