


























हाथरस 30 जून। हाथरस के विकास की तस्वीर जल्द ही बदलने वाली है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने मास्टर प्लान-2041 के तहत जिले को एक आधुनिक हाईटेक अर्बन सेंटर और इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने पर हाथरस न केवल उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहरों की श्रेणी में शामिल होगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, उद्योग और रोजगार का नया केंद्र भी बनेगा। यीडा की योजना के अनुसार यमुना एक्सप्रेसवे फेज-2 के अंतर्गत अलीगढ़, मथुरा, आगरा और हाथरस को चार प्रमुख अर्बन नोड्स के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें हाथरस को औद्योगिक विनिर्माण केंद्र के रूप में विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए हाथरस और सासनी तहसील के 50 से अधिक गांवों को अधिसूचित किया गया है। करीब 4 हजार हेक्टेयर (लगभग 10 हजार एकड़) क्षेत्र में विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त नया औद्योगिक शहर बसाया जाएगा। इस परियोजना का मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड को सौंपी गई है। आधुनिक जीआईएस तकनीक की मदद से शहर का विकास सुनियोजित और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाएगा। उद्योग, आवास और व्यापार का आधुनिक केंद्र बनेगा हाथरस मास्टर प्लान के तहत सबसे बड़ा क्षेत्र उद्योगों के लिए आरक्षित रहेगा, जहां भारी उद्योगों, विनिर्माण इकाइयों और आधुनिक औद्योगिक प्रतिष्ठानों की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही कर्मचारियों और आम नागरिकों के लिए आधुनिक आवासीय सेक्टर, किफायती आवास, बहुमंजिला आवासीय सोसायटियां और सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त कॉलोनियां विकसित की जाएंगी। व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स, होटल, शॉपिंग मॉल, लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउस भी बनाए जाएंगे। पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए कुल भूमि के 15 प्रतिशत से अधिक हिस्से को ग्रीन बेल्ट और खुले क्षेत्रों के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। जेवर एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे से मिलेगा बड़ा फायदा प्रस्तावित हाईटेक शहर की सबसे बड़ी ताकत इसकी रणनीतिक लोकेशन होगी। यह नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा (जेवर) के प्रभाव क्षेत्र में स्थित होगा। इसके अलावा यमुना एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे-93, बरेली-मथुरा हाईवे और स्टेट हाईवे-33 से सीधी कनेक्टिविटी मिलने से उद्योगों, व्यापार और परिवहन को नई गति मिलेगी। आगरा के निकट होने के कारण हाथरस को भविष्य में ताजनगरी के सैटेलाइट टाउन के रूप में भी विकसित करने की योजना है, जिससे आगरा पर बढ़ते औद्योगिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। पारंपरिक उद्योगों को मिलेगा वैश्विक बाजार यह परियोजना हाथरस के पारंपरिक उद्योगों के लिए भी नई संभावनाएं लेकर आएगी। जिले की 10 हजार से अधिक पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों को आधुनिक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत प्रसिद्ध हींग और गुलाल उद्योग को आधुनिक पैकेजिंग, गुणवत्ता परीक्षण और निर्यात सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, जिससे इन उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच और मजबूत होगी। इसके अलावा रेडीमेड गारमेंट्स, कांच के मोती, पीतल के आभूषण, मशीन टूल्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के कलपुर्जों के निर्माण के लिए विशेष औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज और डेयरी उद्योगों को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। लाखों युवाओं के लिए रोजगार की नई उम्मीद यीडा के अधिकारियों के अनुसार परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है तथा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। परियोजना के पूर्ण होने पर हाथरस में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा और जिले की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना हाथरस की पहचान को कृषि प्रधान जिले से आगे बढ़ाकर एक आधुनिक औद्योगिक शहर के रूप में स्थापित करेगी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास को नई दिशा देगी।


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