
हाथरस 17 अक्टूबर । अलीगढ़ रोड स्थित कृषि उत्पादन मंडी समिति में बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। मंडी में खुले में रखा करीब नौ हजार क्विंटल धान बारिश में भीग गया, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि पर्ची कटने और धान का भाव तय होने के बावजूद समय पर तुलाई नहीं हुई। इसके चलते उनकी उपज खुले में पड़ी रही और बारिश की भेंट चढ़ गई। अब व्यापारी भीगे धान के कम दाम लगा रहे हैं, जिससे किसान अपनी फसल औने-पौने भाव पर बेचने को मजबूर हैं।
बारिश से धान को बचाने के लिए किसान रातभर तिरपाल और प्लास्टिक की मदद से अपनी उपज को ढकने में जुटे रहे, लेकिन इसके बावजूद धान भीग गया। इसका सीधा असर फसल के भाव पर पड़ा है। हाथ से कटे धान का भाव 4,250 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर करीब 3,300 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, कंबाइन से कटे धान के दाम भी 3,800 रुपये से गिरकर 3,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। किसानों का कहना है कि पहले ही खेती की लागत निकालना मुश्किल हो रहा है, ऐसे में बारिश और तुलाई में देरी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
मंडी व्यापारी कुलदीप ने बताया कि मजदूरों की कमी के कारण खरीदे गए धान की लोडिंग प्रभावित हुई। मंडी बंद रहने के दौरान पुराने धान को ट्रकों के माध्यम से बाहर भेजने पर जोर दिया गया, जिसके चलते नए धान की तुलाई नहीं हो सकी। वहीं, मंडी सचिव अनिल कुमार के अनुसार, बिक चुके धान की तुलाई कराई गई है। उन्होंने बताया कि शनिवार को किसानों को निर्धारित समय पर मंडी में प्रवेश दिया जाएगा और व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा। सासनी क्षेत्र के गांव हरदपुर निवासी किसान दिलीप कुमार की परेशानी भी इसी अव्यवस्था की तस्वीर पेश करती है। वह बुधवार रात करीब 10 बजे धान लेकर मंडी पहुंचे थे। बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे व्यापारी ने उनका धान 3,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीद लिया, लेकिन शाम पांच बजे तक तुलाई नहीं हो सकी। इसी दौरान बारिश होने से धान भीग गया। अब व्यापारी भीगी उपज खरीदने से कतरा रहे हैं, जिससे किसान को नुकसान की आशंका सता रही है।
इसी तरह इगलास के किसान किशनवीर दो दिन पहले धान लेकर मंडी पहुंचे थे। उनके हाथ से कटे धान का भाव 4,100 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ था और पर्ची भी कट चुकी थी। लेकिन तुलाई होने से पहले ही बारिश ने उनकी उपज भिगो दी। अब व्यापारी भीगे धान का हवाला देकर कम दाम लगा रहे हैं। ऐसे में किसानों के सामने अपनी उपज को नुकसान से बचाने और उचित कीमत पर बेचने की चुनौती खड़ी हो गई है। मंडी में धान भीगने और तुलाई में देरी की घटना ने कृषि उपज के सुरक्षित भंडारण और समय पर तुलाई की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों को उम्मीद है कि मंडी प्रशासन जल्द व्यवस्थाएं सुधारेगा, ताकि उनकी मेहनत से तैयार फसल को बारिश और अव्यवस्था के कारण नुकसान न उठाना पड़े।








