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हाथरस 14 जनवरी । उत्तर प्रदेश की प्रमुख लोकनाट्य विधा नौटँकी के प्रेरणाश्रोत व हाथरसी स्वांग/सांगीत के युगपुरुष साँगीत शिरोमणि हिन्दी भूषण पंडित नथाराम गौड़ की 152वीं जयंती के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य कला संस्कृति केन्द्र, भारत व पं. नथाराम गौड़ लोक-साहित्य शोध संस्थान हाथरस के संयुक्त तत्वाधान में श्याम-प्रेस परिसर में कृतज्ञता अनुष्ठान-2026 का आयोजन हुआ जिसकी अध्यक्षता पं. नथाराम गौड़ की प्रपौत्र वधु शशिबाला गौड़ द्वारा की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद,नई दिल्ली के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी सुनील विश्व कर्मा जी मंचासीन रहे। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष पं. आशीष शर्मा उपस्थित रहे, साथ ही विशिष्ट अतिथि थे डॉ. बी. के. चन्द्रसखी (उप प्राचार्य- दिल्ली शिक्षा विभाग- गाज़ियाबाद), चेतन उपाध्याय (जिलाध्यक्ष- संस्कार भारती हाथरस), आशुकवि पण्डित अनिल बोहरे (प्रांतीय संरक्षक- राष्ट्रीय कवि संगम) आदि। कार्यक्रम का प्रारम्भ अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोकनाट्यविद आचार्य डॉ. खेमचन्द यदुवंशी द्वारा खाटू श्याम वंदना- ‘सुमिर श्याम जी के चरण, मन मूरख नादान। अष्ट सिद्धि नव निद्धिदा करन सकल कल्याण।।‘ से हुआ, इससे पूर्व अतिथियों द्वारा पंडित नथाराम गौड़ के छवि चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत उद्घाटन किया गया।

संस्था के पदाधिकारी प. आशीष गौड़, उपनीत गौड़, राहुल गौड़ ने सभी अतिथियों का शॉल उढ़ाते हुए माल्यार्पण कर स्वागत किया। संस्थान के उपाध्यक्ष आशीष गौड़ ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए संस्थान की गतिविधियों पर संक्षिप्त प्रकाश डाला तथा कोषाध्यक्ष राहुल गौड़ ने संस्था के आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए आगामी सत्र की योजनाओं से अवगत कराया। तदोपरांत कार्यक्रम के प्रथम चरण में एक ओर जहाँ पंडित नथाराम गौड़ के प्रपौत्र कार्तिक गौड़ ने अपने परदादा प. नथाराम गौड़ के कृतित्व व व्यक्त्तिव पर प्रकाश डाला वहीं दूसरी ओर प्रपौत्र स्वास्तिक गौड़ द्वारा संस्थान के उद्देश्यों को स्पष्ट किया गया तथा याशिका गौड़ ने युगपुरुष पंडित नथाराम गौड़ के स्वप्न को साकार करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के द्वितीय चरण में वरिष्ठ कला उन्नायक विद्वतजनों और कला साधकों को पं. नथाराम गौड़ इंटरनेशनल लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड- 2026 से विभूषित किया गया।
● अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक कला उन्नायक डॉ. देवेन्द्र कुमार सारस्वत (केन्द्र निदेशक- आकाशवाणी मथुरा-वृन्दावन व एफ.एम 102.2 मथुरा)
● सुनील विश्वकर्मा (वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी- आई.सी.सी.आर.,नई दिल्ली)
● सुप्रसिद्ध साहित्यकार व शिक्षाविद डॉ. शिखा रानी (सह-आचार्य- द्रोणाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय,दनकौर-गौतमबुद्ध नगर)
● समाजसेवी अजय किशोर गौड़ (प्रबन्धक-सेन्ट.आर.एस. कॉन्वेंट स्कूल, हाथरस)
● शिक्षाविद श्रीमती प्रमिला गौड़ (प्राचार्या-सेन्ट.आर.एस कॉन्वेंट स्कूल,लक्ष्मी नगर,हाथरस)
इसी क्रम में अल्पायु में ही इन नवोद्भित व उदयीमान युवा कलाकारों को सांगीत विधा की गायन कला के प्रति उत्कृष्ट कला अनुराग हेतु प. नथाराम गौड़ साँगीत कौशल किशोर सम्मान – 2026 से अलंकृत किया गया:
● लोकगायक सत्यप्रकाश (हुलवना-मथुरा)
● रंगकर्मी व लोकगायिका कुमारी नन्दिनी गौड़ (हाथरस)
● आनन्द गिरि मायालु
(लुम्बनी-नेपाल)
‘अवधी अमूर्त सांस्कृतिक सम्पदा संरक्षण पुरस्कार-2026’
● विशिष्ट प्रतिभा पुरस्कार से सेन्ट. आर. एस. कॉन्वेंट स्कूल के बाल कलाकारों को इन अवसर पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया जिसमें यशिका शर्मा,जॉइब खान, पायल गौड़, नन्दिनी गौड़,अयान अली,उत्तम सारस्वत,ध्रुव सारस्वत,दीपक गिरि,प्राची शर्मा,करिश्मा कुशवाह प्रमुख थे।

तृतीय चरण में पं. नथाराम गौड़ अंतर्राष्ट्रीय रंगमण्डल हाथरस के कलाकारों ने आचार्य डॉ. खेमचन्द यदुवँशी के निर्देशन में प. नाथराम गौड़ कृत सांगीत- पद्मावती-रणवीर का भावपूर्ण मंचन किया जिसमें बच्चू सिंह राजस्थानी, ऋतुराज यदुवँशी, धर्मपाल सिंह, मास्टर सलीम खान,चौधरी रुस्तम सिंह, महाराज सिंह तौमर,चन्द्र पाल, किशन सिंह सिसौदिया, रमेश चन्द्र, बाबू लाल शर्मा, ठाकुर पूरन सिंह, अशोक कुमार ‘नीलेश’, रेखा उपाध्याय, करिश्मा उपाध्याय आदि कलाकारों की भूमिका प्रमुख रही। संगतकार के रूप में हारमोनियम वादक – वासुदेव नागर, ढोलक वादक – अशोक नगर और नक्कारा वादक – उस्ताद शंकर लाल ने स्वर-लय ताल का संगम प्रस्तुत किया तथा मंच-प्रबंधन प. हरिमोहन पाठक का रहा। इस अवसर पर अपने आशीर्वचन में मुख्य अतिथि सुनील विश्वकर्मा ने कहा- भारतीय लोक कलाओं का अपना अलग ही महत्व है और इन लोककलाओं ने समय समय पर देश को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है हाथरसी नौटंकी को ग्लोबल प्लेटफार्म पर स्थापित करने का पूरा श्रेय इसके प्रणेता पंडित नथाराम गौड़ जी को ही जाता है जिन्होंने अपने अथक प्रयास से लोक रजनी इस विधा को अंतर्राष्ट्रीय तक पहुंचाया था।” विशिष्ट अतिथि पण्डित आशीष शर्मा ने कहा कि लोककलाएं मानव को संस्कृतिपरक संस्कार देती रही हैं। लोक संस्कृति के बिना सभ्य समाज की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है। ऐसे में लोक कलाओं के संरक्षण के प्रति हमें सजग रहना होगा। अपने उद्बोधन में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे आशीष कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि पंडित नथाराम गौड़ ने हाथरस को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई थी इसीलिये पंडित नथाराम गौड़ जी को सरकार सरकार द्वारा मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करना चाहिये।

इस अवसर पर रंगकर्मी राज बंदिस, एडवोकेट राजीव दुबे, माधव सिंघल,सौरभ सिंघल,सौरभ सिंह हींगवाले, बाबा देवी सिंह निडर,श्याम बाबू चिंतन, हरि शंकर सारस्वत, राघवेंद्र सिंह, कवि प्रदीप पण्डित,डॉ. अमरेन्द्र श्रीवास्तव,नेत्र पाल सिंह,डॉ. राज बहादुर सिंह,अशोक कुमार आज़ाद (गाजियाबाद),नेम सिंह कुशवाह,सुनील वर्मा एडवोकेट,अनुज कुमार शर्मा,राजेन्द्र सिंह राणा,जगदीश प्रसाद शर्मा,प्रमोद कुमार वर्मा, अशोक कुमार शर्मा (मथुरा) प्रभु दयाल दीक्षित, पंडित हरिमोहन पाठक, नीलम उपाध्याय, लावणी गायक, चंद्रपाल सिंह, सत्तार अहमद, आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में कु.आरना गौड़, शानवी गौड़,आशीष गौड़, उपनीत गौड़, राहुल गौड़, कार्तिक गौड़, स्वास्तिक गौड़, याशिका गौड़, अनुष्का गौड़, लक्ष्मी गौड़, नीतू गौड़, ज्योति गौड़, प. कुलदीप मिश्रा, ऋषभ पण्डित कुलदीप किशोर शास्त्री, धर्मवीर सिंह, ध्रुव पचौरी आदि का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन आचार्य डॉ. खेमचन्द यदुवंशी शास्त्री द्वारा किया गया तथा संस्थान के कोषाध्यक राहुल गौड़ ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।

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