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सादाबाद 06 मार्च । राया रोड पर गांव पल्हावत के निकट शुक्रवार सुबह करीब तीन बजे हुये दर्दनाक सड़क हादसे में एनएसजी कमांडो की मौत हो गई। उनके तीन दोस्तों की हालत गंभीर है। कमांडो योगेंद्र सिंह उर्फ भूरा गुरुवार को दोस्त के घर हाथरस में होली खेलने थार से आए थे। शुक्रवार सुबह वापस मथुरा लौट रहे थे। थार योगेंद्र ही चला रहे थे। रास्ते में अचानक थार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने चारों घायलों को अस्पताल पहुंचाया, जहां कमांडो की मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि थार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। गेट और पहिए तक अलग हो गए। एयरबैग खुला, लेकिन कमांडो की जान नहीं बच सकी। मथुरा के राया क्षेत्र के रहने वाले कमांडो योगेंद्र सिंह थे। उनके तीन दोस्त विष्णु कुमार, सत्यवीर सिंह और जीतू भी इसी इलाके के रहने वाले हैं। विष्णु नेवी में हैं। उनकी तैनाती विशाखापत्तनम में है, जबकि सत्यवीर और जितेंद्र मथुरा में ही रहते हैं। होली पर योगेंद्र अपने तीनों दोस्तों विष्णु कुमार, सत्यवीर सिंह और जीतू के साथ हाथरस में रहने वाले एक दोस्त से मिलने गए थे। गुरुवार को घर पर होली खेलने के बाद वे हाथरस के लिए निकले और वहां दोस्त के घर होली खेली। कमांडो योगेंद्र सिंह जल्द ही वीआरएस लेने वाले थे। वह अभी अलवर में पोस्टेड थे। शुक्रवार तड़के वे मथुरा लौट रहे थे। सादाबाद थाने के पल्हावत गांव के पास पहुंचे ही थे कि थार अनियंत्रित हो गई। पुलिस ने एंबुलेंस से सभी को अस्पताल पहुंचाया। सादाबाद सीएचसी में प्राथमिक इलाज के बाद आगरा रेफर कर दिया। आगरा पहुंचने पर परिजनों ने कमांडो योगेंद्र सिंह को मिलिट्री हॉस्पिटल मथुरा में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बाकी तीनों दोस्तों का आगरा में इलाज चल रहा है। पुलिस का अनुमान है कि हादसे के वक्त थार की स्पीड 100 से 120 के बीच थी। योगेंद्र सेना में साल 2010 में भर्ती हुए थे। इस समय पठानकोट में उनकी पोस्टिंग थी। परिवार में माता-पिता, पत्नी एकता सिंह, 5 साल की बेटी और 4 माह का बेटा है। योगेंद्र 25 दिन पहले छुट्टी लेकर घर आए थे। योगेंद्र के बड़े भाई धर्मेंद्र ने बताया कि तीन भाइयों में योगेंद्र सबसे छोटे थे। 31 मार्च 2026 को योगेंद्र की नौकरी के 15 साल पूरे होने थे। इसके बाद वह वीआरएस लेने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया। प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह ने बताया है कि कोतवाली में अभी तक किसी ने कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। घायलों को उनके परिजन आगरा ले गए थे, जहां से एनएसजी कमांडो के परिजन उन्हें मथुरा ले गए। वहां इलाज के दौरान मौत हो गई।

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