सिकंदराराऊ 11 जनवरी । एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में कार्यरत पंडित आशीष शर्मा के तिलक पर की गई टिप्पणी का विवाद थम गया है। राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी द्वारा धरना प्रदर्शन के ऐलान के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया और 5 महीने बाद पीड़ित को न्याय मिला। बिहार मिलने के बाद में लोगों में खुशी का माहौल है। विश्वविद्यालय में तथा अन्य स्थानों पर भी मिष्ठान वितरण करके खुशी मनाई गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपित का जीवन मेडिकल कॉलेज से ट्रांसफर करके वित्त विभाग भेज दिया तथा लिखित में माफी नाम भी लिया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर तथा एसएचओ सिविल लाइन मौके पर मौजूद रहे।
राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी ने 7 जनवरी को विश्वविद्यालय की कुलपति एवं जिलाधिकारी अलीगढ़ एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अलीगढ़ को पत्र भेजा था जिसमें कहा गया था कि यदि पंडित आशीष शर्मा को 7 दिन के अंदर न्याय नहीं मिला तो विद्यालय के गेट पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा जिसमें पूरे प्रदेश से ब्राह्मण समाज के लोग व संतजन शामिल होंगे। पत्र जारी होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। साथ ही करणी सेना तथा अन्य हिंदू संगठनों ने धरने में समर्थन का ऐलान कर दिया। महामंडलेश्वर पूर्णानंद पुरी जी महाराज समेत कई संतों ने भी धरने को लेकर अपना समर्थन व्यक्त किया। विश्वविद्यालय प्रशासन भी दबाव में आया और आरोपित पर कार्यवाही करने की तैयारी कर ली। शनिवार को विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं एसएचओ सिविल लाइन की मौजूदगी में आरोपित कर्मी की स्थानांतरण का पत्र जारी किया गया। आरोपित समीर मुर्सिल ने अपने द्वारा किए गए टिप्पणी पर माफी नामा भी दिया। इसके बाद पंडित आशीष शर्मा एवं राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी ने धरना रद्द करने की घोषणा की। श्री चतुर्वेदी ने कहा की पंडित आशीष शर्मा को न्याय मिल गया है अब धरने की आवश्यकता नहीं है। दुख इस बात का है कि यह न्याय 5 महीने बाद मिल पाया। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन पहले ही इस तरह के लोगों को रोकने का प्रयास करता तो मामला इतना नहीं बढ़ता। विश्वविद्यालय के अंदर यदि फिर किसी छात्र या कमी के साथ हिंदू होने पर इस तरीके का व्यवहार किया गया तो हम आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। तिलक सनातन धर्म की परंपरा है। तिलक हिंदुओं की शान है। सनातन पर अगर चोट की जाएगी तो बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सनातन सबके साथ अच्छा व्यवहार करना सिखाता है लेकिन यदि कोई हमारे धर्म के खिलाफ टिप्पणी करेगा तो हम चुप नहीं बैठेंगे।
यह था मामला
5 महीने पूर्व अगस्त 2025 में जेएन मेडिकल कॉलेज में कार्यरत समीर मुर्सिल मैं मेडिकल कॉलेज में ही कार्यरत आशीष शर्मा के तिलक को लेकर टिप्पणी कर दी। उनके मना करने पर उन्हें ऑफिस से बाहर कर दिया। अगले दिन दोबारा मिलने पर फिर से उनके तिलक पर टिप्पणी की। जिसकी शिकायत पंडित आशीष शर्मा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से की लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। जब पंडित आशीष शर्मा ने धरने पर बैठने की बात कही तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक जांच कमेटी बनाकर जांच कराने की बात कही लेकिन 5 महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस दौरान पंडित आशीष शर्मा ने विभिन्न माध्यमों से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री देश के प्रधानमंत्री समय सभी जगह पत्र भेजकर इसकी शिकायत की थी। विश्वविद्यालय प्रशासन के कान पर फिर भी जू नहीं रेंगी। 7 जनवरी को राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी ने धरने का ऐलान करते हुए पत्र जारी किया था। इसके चार दिन बाद ही पीड़ित को न्याय मिल गया।




















