
हाथरस 12 अप्रैल । शहर के प्रतिष्ठित बागला महाविद्यालय से जुड़े चर्चित प्रकरण में कॉलेज प्रबंध समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रोफेसर रजनीश कुमार को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) दे दी है। न्यायालय से बरी होने के बावजूद, कॉलेज प्रशासन ने संस्थान की छवि और प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए आंतरिक जांच के बाद यह अंतिम निर्णय लिया है। प्रबंध समिति के अध्यक्ष वैद्य गोपाल शरण गर्ग ने बताया कि आंतरिक जांच में प्रोफेसर रजनीश को बर्खास्त करने के लिए पर्याप्त तकनीकी आधार नहीं मिले थे। हालांकि, इस पूरे प्रकरण के कारण कॉलेज की प्रतिष्ठा को जो क्षति पहुंची है, उसे देखते हुए समिति ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प अपनाया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रोफेसर रजनीश की ओर से दोबारा कार्यभार ग्रहण करने और वीआरएस के लिए कई आवेदन दिए गए थे, जिन पर विचार करने के बाद समिति ने सेवानिवृत्ति को मंजूरी दी। भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए प्रोफेसर के कॉलेज परिसर में प्रवेश पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
गुमनाम शिकायत और फर्जी पतों का मामला
प्रकरण की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए अध्यक्ष ने बताया कि यह मामला एक अज्ञात शिकायत के बाद सुर्खियों में आया था। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के दौरान पता चला कि संबंधित युवती का नाम और पता फर्जी था। मामले में एक सीडी भी प्राप्त हुई थी, लेकिन प्रबंध समिति के पास उसकी सत्यता के लिए फोरेंसिक जांच कराने का अधिकार नहीं था। अन्य सक्षम अधिकारियों की जांच में भी ठोस साक्ष्य मिलने की पुष्टि नहीं हुई। निर्णय लेने के लिए आयोजित बैठक में मुख्य रूप से प्रबंध समिति के सचिव प्रदीप कुमार बागला, सदस्य शशिकांत बागला, रामबिहारी अग्रवाल, भोलानाथ अग्रवाल, राजीव अग्रवाल और प्राचार्य डॉ. महावीर सिंह छोंकर आदि उपस्थित रहे। इस फैसले के बाद शिक्षा जगत और कॉलेज परिसर में दिनभर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

























