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सासनी 26 मार्च । क्षेत्र के निकटवर्ती गांव समामई में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गुरुवार को कथावाचक पंडित रिंकल शास्त्री ने भगवान इंद्र के अहंकार और गोवर्धन पर्वत धारण की अलौकिक कथा का वर्णन किया। कथा के दौरान पूरा पंडाल ‘गिरिराज धरण की जय’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा और श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर नजर आए। कथावाचक ने प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा बंद कर दी, तो इंद्र ने क्रोधित होकर ब्रज को जलमग्न करने के लिए मूसलाधार वर्षा का आदेश दिया। ब्रजवासियों की रक्षा और इंद्र का अभिमान तोड़ने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने सात कोस के विशाल गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका उंगली पर सात दिनों तक धारण किए रखा। अंत में इंद्र को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने भगवान से क्षमा याचना की। कथा के अंत में गोवर्धन महाराज की भव्य आरती उतारी गई और प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से कन्हैयालाल, विजयपाल, भूमिका देवी, गौतम कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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