
नई दिल्ली 30 मार्च । राज्यसभा में विशेष उल्लेख के द्वारा समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने उत्तर प्रदेश के बंजारा समाज को अनुसूचित जनजाति (एस०टी०) में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बंजारा समाज उत्तर प्रदेश के 26 जिलों मुख्यतः सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, बिजनौर, मुरादाबाद, अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज, कानपुर नगर, कानपुर देहात, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच, श्रावस्ती आदि जिलों में निवास करता है जिसकी आबादी 20 लाख से भी अधिक है। यह समाज मुख्यतः नगला डेरा, टांडा जैसे भौगोलिक रूप से अलग क्षेत्रों में रहता है, यह समाज अपनी विशिष्ट बोलीभाषा, परंपराओं तथा आदिवासी जीवन शैली को आज भी संजोए हुए है। वर्तमान में बंजारा समाज को ओबीसी सूची में रखा गया है जो न्यायसंगत नहीं है। श्री सुमन ने कहा कि सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आधार पर बंजारा जाति को अनुसूचित जनजाति में होना चाहिए। उत्तर प्रदेश की सरकारों ने वर्ष 1993,1998, 2001, 2005, 2013, 2015 तथा 2019 में कुल सात बार भारत सरकार से संस्तुति करके आग्रह किया है कि बंजारा समाज को एस०टी० वर्ग में शामिल किया जाए। शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा तीन बार सर्वेक्षण करके अपनी रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी है लेकिन अभी भी ये मामला लंबित है बंजारा समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने से उन्हें शिक्षा, रोजगार तथा सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि बंजारा समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाए जिससे उन्हें समुचित अधिकार मिले जिससे उन्हें सामाजिक न्याय मिल सके।


























