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हाथरस 17 मार्च । हसायन तहसील क्षेत्र के ग्राम नगला मया निवासी एक गरीब किसान चंद्रपाल सिंह प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर मंगलवार (17 मार्च) से जिलाधिकारी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गया है। किसान का कहना है कि चकरोड संख्या 124, जो उसके खेत तक जाने का एकमात्र जरिया है, वह अब दलदल में तब्दील हो चुका है। समाधान न होने तक किसान ने घर न लौटने की कसम खाई है। किसान चंद्रपाल ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि गांव की नालियों का गंदा पानी चकरोड पर बहाए जाने से वहां पैदल चलना भी दूभर है। रीढ़ की हड्डी के दर्द से जूझ रहे चंद्रपाल को मजबूरी में चारा, भूसा और बीज सिर पर ढोकर खेत तक ले जाना पड़ रहा है, क्योंकि वहां ट्रैक्टर या मोटरसाइकिल ले जाना नामुमकिन है।

25 शिकायतें और IGRS का ‘झुनझुना’

किसान का आरोप है कि वह अब तक जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी के चक्कर काटकर करीब 25 बार लिखित शिकायत दे चुका है, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। मंगलवार को भी जब वह जिलाधिकारी से मिला, तो उनकी समस्या का समाधान करने के बजाय उसे केवल IGRS पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया। पोर्टल पर शिकायत डालने से धरातल पर कोई सुधार नहीं हुआ, जिससे आहत होकर किसान ने गांधीवादी तरीके से धरने का रास्ता चुना।

खेती और बुजुर्ग माता-पिता की चिंता

चंद्रपाल अपने परिवार का इकलौता सहारा है। घर में बुजुर्ग माता-पिता और पशुओं के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उसके कंधों पर है। गेहूं की फसल तैयार खड़ी है, लेकिन रास्ता न होने के कारण उसे मंडी तक ले जाने और भूसा घर लाने की चिंता उसे सता रही है। किसान ने स्पष्ट किया कि जब तक रास्ते का पूर्ण समाधान नहीं होगा, वह कलेक्ट्रेट परिसर नहीं छोड़ेगा।

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