सिकंदराराऊ (हसायन) 14 मार्च । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव का असर अब हाथरस के स्थानीय उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। शासन के आदेश पर कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति पर लगी रोक और घरेलू गैस की किल्लत ने कस्बा के मिनी चूड़ी उद्योग को पूरी तरह चौपट कर दिया है। कामकाज बंद होने से कारीगर और मजदूर भुखमरी की कगार पर पहुँच गए हैं।
100 से अधिक इकाइयां तालाबंदी की दहलीज पर
कस्बे में गैस और लकड़ी से संचालित होने वाली करीब 100 मिनी चूड़ी भट्ठियां पूरी तरह बंद पड़ी हैं। इन भट्टियों के बंद होने से सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए हैं। प्रत्येक एकल भट्ठी पर एक कुशल कारीगर और एक हेल्पर (फिरंगाई करने वाला) काम करता है। ईंधन न मिलने के कारण चूड़ी निर्माण का काम पूरी तरह रुक गया है, जिससे कारीगरों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
लकड़ी के बढ़ते दाम भी बने आफत
गैस की आपूर्ति में कटौती का सीधा असर लकड़ी के भाव पर भी पड़ा है। गैस की किल्लत देखते हुए लकड़ी विक्रेताओं ने कीमतों में भारी इजाफा कर दिया है। वर्तमान में लकड़ी 11 रुपये प्रति किलो (1,100 रुपये प्रति कुंतल) के भाव पर बिक रही है। बढ़ती महंगाई के कारण लकड़ी से चलने वाले करीब एक दर्जन कारखाने भी बंद पड़े हैं। न तो गैस मिल रही है और न ही महंगी लकड़ी खरीदकर उत्पादन करना आर्थिक रूप से संभव हो पा रहा है।
जिम्मेदार मौन, बढ़ रहा असंतोष
स्थानीय उद्योगपतियों और कारीगरों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही, तो जल्द ही पूरे कस्बे का चूड़ी उद्योग इतिहास बनकर रह जाएगा। कारीगरों ने आरोप लगाया कि अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने उनकी सुध नहीं ली है। उद्योग को बचाने के लिए ईंधन की आपूर्ति सुचारू करना अनिवार्य है, अन्यथा इन मेहनतकश मजदूरों को भुखमरी से बचाना मुश्किल होगा।




















