
हाथरस 11 मार्च । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आज जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) हाथरस में महिला सशक्तिकरण एवं विधिक जागरूकता विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस की सचिव अनु चौधरी ने की। इस अवसर पर डायट की प्राचार्या एवं उप शिक्षा निदेशक डॉ. निशा अस्थाना, प्रवक्ता डॉ. सरिता वर्मा, डॉ. कृष्णगोपाल, डॉ. चरनजीत, डॉ. अमित राय, डॉ. कुलदीप, पराविधिक स्वयंसेवक साहब सिंह, मनु दीक्षित और वैष्णो देवी सहित संस्थान के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। शिविर को संबोधित करते हुए सचिव अनु चौधरी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को विशेष महत्व दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को इस वर्ष “अधिकार, न्याय, कार्रवाई सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए” विषय के तहत मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने, न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने बताया कि आज महिलाएं शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। कभी कमजोर समझी जाने वाली महिलाओं ने अपनी मेहनत और मेधा के बल पर हर क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कन्या भ्रूण हत्या एक दंडनीय अपराध है और इसके लिए कानून में सख्त प्रावधान किए गए हैं। साथ ही उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति भी न्याय से वंचित न रहें, इसके लिए प्राधिकरण पात्र लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराता है।
इस दौरान प्राचार्या डॉ. निशा अस्थाना ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम की जानकारी देते हुए कहा कि संविधान के तहत 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। 1 अप्रैल 2010 से लागू इस कानून के तहत हर बच्चे को पहली से आठवीं तक नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ स्कूलों में पेयजल, खेल सामग्री और खेल मैदान जैसी आवश्यक सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। पराविधिक स्वयंसेवक साहब सिंह और मनु दीक्षित ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए नारी शक्ति और 14 मार्च को आयोजित होने वाली लोक अदालत के संबंध में जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सरिता वर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि कानून का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए और शिविर में प्राप्त जानकारियों का लाभ उठाना चाहिए। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं के बीच कला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।


























