
हाथरस 10 मार्च । नगर पालिका परिषद हाथरस में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे पदोन्नति पाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) जयहिंद कुमार सिंह ने इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए एसडीएम सदर को स्वयं प्रारंभिक जांच करने और 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को नियत की गई है।
वरिष्ठ लिपिक ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप
यह आदेश नगर पालिका के वरिष्ठ लिपिक विद्यासागर शर्मा द्वारा दायर याचिका पर दिया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि विभाग के ही एक अन्य कर्मचारी, लेखा लिपिक संजय अग्रवाल ने पदोन्नति पाने के उद्देश्य से बी.कॉम की फर्जी मार्कशीट का सहारा लिया है। विद्यासागर शर्मा के अनुसार, संजय अग्रवाल की मार्कशीट पर अंकित एनरोलमेंट नंबर (PROV/Jul 11/54524) की जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जांच कराई गई, तो वह पूरी तरह फर्जी और कूटरचित पाई गई।
प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने पर कोर्ट की शरण
याचिकाकर्ता का दावा है कि इस फर्जीवाड़े के कारण उन्हें और अन्य पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के लाभ से वंचित होना पड़ा है। उन्होंने न्यायालय को बताया कि इस संबंध में पहले पुलिस अधीक्षक और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को भी लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन उन्हें न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
10 दिन में मांगी गई जांच रिपोर्ट
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। सीजेएम ने एसडीएम सदर को निर्देशित किया है कि वे प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करें। इस आदेश के बाद नगर पालिका गलियारे में हड़कंप मच गया है। अब सभी की नजरें एसडीएम की जांच रिपोर्ट और 24 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।




































