
सिकंदराराऊ (पुरदिलनगर) 07 मार्च । कस्बे में पिछले 100 वर्षों से चली आ रही होली के बाद आयोजित होने वाले पारंपरिक दंगल और फूलडोल मेले की परंपरा इस वर्ष विवादों की भेंट चढ़ गई। दंगल की भूमि पर अवैध कब्जे और प्रशासन की उदासीनता से नाराज सर्व समाज ने इस वर्ष मेला और दंगल का पूर्ण बहिष्कार करने का कड़ा निर्णय लिया है।
क्या है विवाद?
हसायन रोड स्थित मोहल्ला गढ़ में दंगल के लिए निर्धारित भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। शुक्रवार सुबह जब मेला कमेटी के सदस्य दंगल भूमि की सफाई के लिए पहुंचे, तो वहां मौजूद कुछ लोगों और महिलाओं ने कथित रूप से अभद्रता करते हुए काम रुकवा दिया। इस घटना के बाद मामला गरमा गया। इससे पहले सांसद अनूप प्रधान के आश्वासन पर समाज के लोगों ने बहिष्कार के फैसले को कुछ समय के लिए स्थगित किया था, लेकिन प्रशासन द्वारा मौके पर समाधान न निकाले जाने और सफाई के दौरान हुए विवाद से आक्रोशित सर्व समाज ने माहेश्वरी धर्मशाला में एक आपात बैठक बुलाई।
आयोजन रद्द करने का निर्णय
बैठक में उपस्थित सर्व समाज के गणमान्य नागरिकों ने एकमत होकर दंगल और शाम को निकलने वाले फूलडोल मेले को पूरी तरह रद्द करने का निर्णय लिया। आक्रोशित लोगों का कहना है कि प्रशासन की घोर लापरवाही के चलते हमारी सांस्कृतिक विरासत पर संकट मंडरा रहा है।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में सुरेश चंद आर्य, बंटी आर्य, के.के. शर्मा, रिंकू शर्मा, आमोद शर्मा, ओमप्रकाश गुप्ता, अभिनव जाकेटिया, सचिन दीक्षित, संजय दुबे, सोनू व्यनी, वरुण राठी, महावीर कुशवाहा, राजा बाबू कुशवाहा, नरेंद्र आर्य और श्याम बाबू सहित कस्बे के तमाम प्रमुख लोग उपस्थित रहे। सर्व समाज के इस कड़े रुख से प्रशासन के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासन ने अवैध कब्जे को हटवाया होता, तो आज 100 साल पुरानी परंपरा को इस तरह रद्द करने की नौबत नहीं आती।


































