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सादाबाद 05 मार्च । यमुना एक्सप्रेस-वे का मात्र तीन किलोमीटर का हिस्सा हाथरस जिले की सीमा में आता है, लेकिन विडंबना यह है कि इस छोटे से टुकड़े तक पहुंचना जिला प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के लिए सादाबाद के गांव मिढ़ावली के पास प्रस्तावित ‘कट’ के बंद होने के कारण एम्बुलेंस और पुलिस की गाड़ियों को करीब 11 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ता है।

अधूरा प्रावधान बनी बड़ी मुसीबत

एक्सप्रेस-वे निर्माण के समय मिढ़ावली के पास कट बनाने का प्रावधान था, जिसे निर्माण पूरा होने के बाद किन्हीं कारणों से बंद कर दिया गया। वर्तमान स्थिति यह है कि यदि सादाबाद से सीधे एक्सप्रेस-वे पर पहुंचना हो, तो मात्र 17 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन कट बंद होने के कारण अब राहत टीमों को आगरा के खंदौली कट से होकर लगभग 28 किलोमीटर का चक्कर काटकर आना पड़ता है।

हादसों में भारी पड़ती है देरी

बीते मंगलवार को हुए सड़क हादसे के दौरान भी राहत टीमों को पहुंचने में हुई देरी ने इस समस्या को एक बार फिर उजागर कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि मिढ़ावली कट खुला होता, तो घायलों को समय पर उपचार मिल सकता था। न केवल राहत टीमें, बल्कि जिले के अधिकारी भी एक्सप्रेस-वे का निरीक्षण करने के लिए मथुरा के राया कट या आगरा के खंदौली का सहारा लेने को मजबूर हैं। परिवहन विभाग की रिपोर्ट में भी स्वीकार किया गया है कि इस मार्ग पर चलने वाले वाहनों की नियमित जांच न हो पाने का मुख्य कारण यही दुर्गमता है।

ग्रामीणों की मांग अनसुनी

मिढ़ावली के ग्राम प्रधान राजेश कुमार ने बताया कि गढ़ी हरिया के पास कट का ढांचा तो तैयार है, लेकिन इसे चालू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “मथुरा के बलदेव क्षेत्र में सराय गांव के पास कट की सुविधा है, तो हाथरस के मिढ़ावली क्षेत्र के साथ भेदभाव क्यों? हमने कई बार इसे खोलने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।” ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का स्पष्ट मानना है कि यदि यह कट खुल जाता है, तो न केवल आपातकालीन स्थितियों में कीमती जान बचाई जा सकेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।

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