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हाथरस 27 फरवरी । हाथरस शहरवासियों को दशकों पुराने जलभराव के दंश से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन ने एक बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। शहर का वर्तमान ड्रेनेज सिस्टम लगभग 75 साल पुराना है, जिसे वर्ष 1950 के आसपास तब की 50 हजार की आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया था। आज शहर की आबादी तीन लाख के पार पहुँच चुकी है, जिसके कारण पुराना अंडरग्राउंड नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है और श्रीनगर, मोहनगंज, मुरसान गेट व विजयनगर जैसे इलाकों में जलभराव एक बड़ी मुसीबत बन गया है। अब नगर पालिका 6.50 करोड़ रुपये के बजट से एक आधुनिक और वैज्ञानिक ड्रेनेज नेटवर्क तैयार करने जा रही है। इसके लिए जल निगम और नगर पालिका की संयुक्त टीम ने ‘ग्रेडिएंट सर्वे’ (ढलान का आकलन) शुरू कर दिया है, ताकि बिना किसी पंपिंग के पानी प्राकृतिक रूप से प्रवाहित हो सके।

इस नई ड्रेनेज व्यवस्था को नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत 122 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जोड़ा जाएगा। शहर के भौगोलिक हालातों को देखते हुए पूरे शहर की निकासी का ढलान जलेसर रोड स्थित सीवेज फार्म की तरफ रखा जाएगा। ईओ नगर पालिका रोहित सिंह के अनुसार, यह प्रोजेक्ट आगामी 50 वर्षों की जरूरतों और आबादी के विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इस मास्टर प्लान के लागू होने से न केवल बारिश के दौरान होने वाले जलभराव से राहत मिलेगी, बल्कि गंदे पानी की निकासी भी सुव्यवस्थित हो सकेगी। वर्तमान में चल रहा ग्रेडिएंट सर्वे पूरा होते ही धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

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