
हाथरस 11 फरवरी । उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए 9.12 लाख करोड़ रुपये के आम बजट को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा से लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस तक विपक्ष ने बजट को लेकर सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए, वहीं सत्ता पक्ष ने इसे विकासोन्मुखी और ऐतिहासिक बताया है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष विवेक उपाध्याय ने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट आम जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नजर नहीं आता। किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी नहीं दी गई है, जबकि युवाओं के रोजगार सृजन के लिए भी स्पष्ट और प्रभावी योजना का अभाव है। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग, छोटे व्यापारियों, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को अपेक्षित राहत नहीं मिली है। ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी ठोस घोषणा नहीं की गई। कांग्रेस ने इसे “दिखावे का बजट” बताते हुए कहा कि पार्टी जनता के हक और अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुशवाहा ने बजट को केवल “आंकड़ों का खेल” करार दिया। उन्होंने कहा कि इसमें युवाओं के रोजगार के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है और सभी वर्गों का भरोसा सरकार से टूट चुका है। उनके अनुसार यह बजट जमीनी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने में विफल है।
बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष राज कपूर ने कहा कि 2026-27 का यह बजट लोकलुभावन अधिक प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि जनता की वास्तविक जरूरतों और सर्वसमाज के समग्र विकास की झलक कम दिखाई देती है। उन्होंने आशंका जताई कि घोषणाएं कहीं कागजों तक सीमित न रह जाएं और मजदूर, किसान, व्यापारी व छात्रों के हित में जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
भाजपा विधायक ने बताया ऐतिहासिक
वहीं हाथरस सदर विधायक अंजुला सिंह माहौर ने बजट का स्वागत करते हुए इसे ‘नए भारत’ और ‘नए उत्तर प्रदेश’ की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट गांव, गरीब, किसान, महिला, युवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, एआई, इंफ्रास्ट्रक्चर और तीर्थ विकास को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच के अनुरूप इस बजट को ऐतिहासिक बताते हुए मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री का आभार व्यक्त किया। बजट को लेकर प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
















