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हाथरस 07 फरवरी । दून पब्लिक स्कूल में विद्यालय प्रधानाचार्य जेके अग्रवाल के प्रेरणादायी निर्देशन में अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत चीन स्थित डिपोंट हुआयाओ कॉलेजिएट स्कूल, कुनशान के साथ एक ज्ञानवर्धक वर्चुअल मीट का आयोजन किया गया। यह वर्चुअल संवाद “ (दिनचर्या)” थीम पर आधारित था, जिसमें दोनों देशों के विद्यार्थियों ने अपने दैनिक जीवन, शैक्षणिक संस्कृति, पढ़ाई के दबाव, करियर विकल्पों तथा जीवन संतुलन जैसे विषयों पर खुले मन से विचार साझा किए। इस संवाद में चीनी विद्यार्थियों द्वारा भारतीय दून पब्लिक स्कूल, हाथरस के विद्यार्थियों से स्कूल टाइमिंग, असेंबली, लंच ब्रेक, क्लासरूम कल्चर, गुरु-शिष्य परंपरा, होमवर्क, ट्यूशन सिस्टम, जेईई-नीट जैसी प्रवेश परीक्षाओं, पढ़ाई के दबाव और स्ट्रेस मैनेजमेंट से जुड़े प्रश्न पूछे गए। वहीं भारतीय विद्यार्थियों ने भी सामाजिक जिम्मेदारी, सांस्कृतिक विविधता, शांति व एकता, नागरिक कर्तव्यों तथा भविष्य की योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। इस वर्चुअल मीट में दून पब्लिक स्कूल के कक्षा 11 के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय इस सीनियर कोऑर्डिनेटर रीटा शर्मा एवं शिक्षक सागर जोशी की विशेष भूमिका रही, जबकि पूरे कार्यक्रम का वीडियो रिकॉर्डिंग कार्य कपिल कुमार सर द्वारा किया गया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास, संवाद कौशल और वैश्विक दृष्टिकोण का उत्कृष्ट परिचय दिया। यह वर्चुअल मीट न केवल शैक्षणिक जानकारी का आदान-प्रदान रही, बल्कि भारत और चीन के विद्यार्थियों के बीच सांस्कृतिक समझ, आपसी सम्मान और मित्रता को मजबूत करने का एक सार्थक माध्यम भी बनी।

इस अवसर पर विद्यालय प्रधानाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि “आज के वैश्विक युग में विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय संवाद अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की वर्चुअल मीट विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि विभिन्न देशों की संस्कृति, सोच और जीवनशैली को समझने का अवसर प्रदान करती हैं। ‘डे इन द लाइफ’ जैसी थीम छात्रों को आत्ममंथन के साथ-साथ दूसरों के जीवन को समझने की संवेदनशीलता भी सिखाती है। मुझे गर्व है कि हमारे विद्यार्थी इतने आत्मविश्वास के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने विचार रख रहे हैं। यह अनुभव उन्हें जिम्मेदार वैश्विक नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करेगा।” प्रधानाचार्य ने शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को भविष्य में भी ऐसे वैश्विक संवादों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।

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