
हाथरस 31 जनवरी । दिल्ली स्थित मालवीय भवन में यूजीसी कानून को लेकर सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ सहित करनी सेना व अन्य सवर्ण संगठनों के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने भाग लिया। कुल 30 सवर्ण संगठनों की उपस्थिति में यूजीसी कानून पर विस्तार से चर्चा की गई और इसके विरोध में एकजुट होकर आंदोलन का निर्णय लिया गया। बैठक में सर्वसम्मति से आगामी 1 फरवरी को भारत बंद का समर्थन करते हुए देशव्यापी बंद का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी कानून सवर्ण समाज के हितों के विपरीत है और इससे शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सभी संगठनों ने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का संकल्प लिया। बैठक के दौरान राष्ट्रीय सवर्ण परिषद (RSP) द्वारा प्रस्तावित सवर्ण स्वाभिमान पदयात्रा की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि यह पदयात्रा 7 फरवरी को हाथरस से प्रारंभ होकर 12 फरवरी को दिल्ली पहुंचेगी। पदयात्रा के माध्यम से सवर्ण समाज को संगठित कर उनके अधिकारों, सम्मान और स्वाभिमान के लिए आवाज बुलंद की जाएगी।
इस अवसर पर “ब्राह्मण-क्षत्रिय-बनिया अब अत्याचार नहीं सहने वाला” नारा आंदोलन का मुख्य स्वर बना। वक्ताओं ने कहा कि यदि सनातन संस्कृति को बचाना है तो समाज के सभी वर्गों क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य, कायस्थ के साथ-साथ जाट, गुर्जर, यादव सहित पूरे कुटुंब को एक मंच पर लाना होगा। बैठक में मौजूद नेताओं ने संकल्प लिया कि सवर्ण समाज के हितों की रक्षा के लिए यह आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक होगा। सभी संगठनों ने आने वाले दिनों में व्यापक जनसंपर्क और आंदोलन को और मजबूत करने की रणनीति पर भी चर्चा की।

















