
हाथरस 28 जनवरी । दून पब्लिक स्कूल में दिनांक 23 जनवरी को प्रधानाचार्य के सुदृढ़ नेतृत्व में ब्रिटिश काउंसिल परियोजना के अंतर्गत रिड्स गतिविधि के तहत एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल मीट का आयोजन किया गया। इस गतिविधि का केंद्रीय विचार“एकजुट होकर हम खड़े रहते हैं, विभाजित होकर हम गिर जाते हैं।” रहा। विषय “युद्ध के समय राष्ट्रीय एकता – भारत, पाकिस्तान, रूस, यूक्रेन और युगांडा” पर कक्षा ग्यारहवीं एवं बारहवीं के विद्यार्थियों ने भारत से दून पब्लिक स्कूल, हाथरस तथा युगांडा से डीपीएस इंटरनेशनल स्कूल, युगांडा के प्रधानाचार्य श्री स्वामीनाथन, उपप्रधानाचार्य दीपक जगदीश, शिक्षिका चित्रा थेक्कनमकुन्नेल चाकोचन-सामाजिक विज्ञान शिक्षिका तथा विद्यार्थियों के साथ सार्थक संवाद किया।
रिड्स गतिविधि के अंतर्गत भारत एवं युगांडा के विद्यार्थियों ने यह अध्ययन किया कि युद्ध का देशों और समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है तथा राष्ट्रीय एकता क्यों आवश्यक है। युगांडा के विद्यार्थियों ने वर्चुअल मंच पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए बताया कि संघर्ष के समय एकता और विभाजन किस प्रकार किसी देश की दिशा तय करते हैं। चर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने यह समझने का प्रयास किया कि युद्ध के समय राष्ट्रीय एकता का वास्तविक अर्थ क्या होता है? युगांडा जैसे देशों में संघर्ष के दौरान एकता अथवा विभाजन किस प्रकार सामने आया?तथा विभिन्न देशों के ऐतिहासिक उदाहरणों के माध्यम से एकता की भूमिका का विश्लेषण किया गया। विद्यार्थियों ने समूहों में बैठकर संघर्ष से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों और प्रमुख घटनाओं पर गंभीर मंथन किया, जिससे उनमें वैश्विक दृष्टिकोण और आलोचनात्मक सोच का विकास हुआ।
प्रश्नोत्तरी सत्र में भारत की ओर से विद्यार्थियों ने प्रश्न किए
- छात्र अपने स्कूल और समुदाय में शांति और दया फैलाने के लिए प्रतिदिन कौन-से छोटे-छोटे कदम उठा सकते हैं?
- 2. एक खुश और एकजुट समाज के लिए शांति क्यों आवश्यक है?वहीं युगांडा के विद्यार्थियों ने भी गहन विचारोत्तेजक प्रश्नों पर चर्चा की—1. रूस–यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में नागरिक बिना हिंसा के एकता का समर्थन कैसे कर सकते हैं?2. क्या युद्ध एक साझा पहचान बनाकर देश को एकजुट करता है या यह धर्म, जाति और राजनीति की गहरी दरारों को उजागर करता है?
- क्या युद्धकालीन राष्ट्रीय एकता सच्ची देशभक्ति की निशानी होती है या कभी-कभी आलोचना को दबाने का साधन भी बन जाती है?भारत, पाकिस्तान, रूस, यूक्रेन और युगांडा के उदाहरणों के माध्यम से स्वैच्छिक एकता और सरकार द्वारा निर्मित एकता के बीच के अंतर को भी स्पष्ट किया गया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “ऐसी अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल गतिविधियाँ विद्यार्थियों को केवल विषयगत ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि उन्हें वैश्विक नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करती हैं। युद्ध और संघर्ष के समय राष्ट्रीय एकता का महत्व समझना आज की युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत आवश्यक है। मुझे गर्व है कि हमारे विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सार्थक संवाद कर रहे हैं और शांति, सहअस्तित्व तथा मानवीय मूल्यों को समझने का प्रयास कर रहे हैं।” इस सफल आयोजन में परियोजना प्रभारी सीनियर कोऑर्डिनेटर रीटा शर्मा, फाउंडेशन कोऑर्डिनेटर नम्रता अग्रवाल, इंचार्ज शिक्षक सागर जोशी एवं कपिल कुमार टेक्निकल सहायक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस वर्चुअल मीट में छात्र यथार्थ जैन एवं छात्रा तनवी जैन के अभिभावक आशीष जैन, प्रधानाचार्य सेंट विवेकानंद जूनियर स्कूल, सादाबाद की उपस्थिति भी उल्लेखनीय थी। वर्चुअल मीट के अंत में प्रधानाचार्य ने सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी और भविष्य में भी ऐसी शैक्षिक एवं वैश्विक सहभागिता वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की बात कही।

















