
हाथरस 27 जनवरी । अखिल भारतीय वैश्य सम्मेलन के जिलाध्यक्ष कन्हैया वार्ष्णेय तेल वाले ने भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय को ईमेल के माध्यम से UGC के नियमों को लेकर एक ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को छात्र-विरोधी, शिक्षा-विरोधी और सामाजिक एकता को कमजोर करने वाला बताया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि यूजीसी की नीतियाँ छात्रों को शिक्षा से जोड़ने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से दबाव में डाल रही हैं। बढ़ती फीस, अस्थिर पाठ्यक्रम, शोध पर नियंत्रण और रोजगारहीन शिक्षा जैसी समस्याओं का जिक्र करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि यह नियम देश के लाखों छात्रों के हित में नहीं हैं। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि यूजीसी की नीतियाँ शिक्षा परिसरों में वैचारिक टकराव और विभाजन को बढ़ावा देकर हिंदू समाज की एकता को कमजोर करने का कारण बन रही हैं। ज्ञापन में यह मांग की गई है कि ऐसे “काले कानूनों” को तुरंत समाप्त किया जाए और शिक्षा प्रणाली को भारतीय संस्कृति एवं सनातन मूल्यों के अनुरूप पुनर्गठित किया जाए। ज्ञापन में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि यूजीसी के नियमों को वापस नहीं लिया गया तो देशव्यापी जन आंदोलन और लोकतांत्रिक संघर्ष को तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार और यूजीसी की होगी। ज्ञापन में प्रधानमंत्री से अपेक्षा जताई गई है कि छात्रों के भविष्य, शिक्षकों की गरिमा और समाज की एकता की रक्षा सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन भेजने के बाद कन्हैया वार्ष्णेय ने कहा कि यह पत्र “देश के लाखों जागरूक नागरिकों की आवाज़” है और सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

















