
हाथरस 20 जनवरी । हाथरस जिले की ऐतिहासिक पहचान और राजा दयाराम के शौर्य का प्रतीक किला परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने की तैयारी की जा रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) विभाग द्वारा संरक्षित इस किला परिसर के ताजा सर्वे में प्रतिबंधित क्षेत्र में 429 अवैध मकान चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें हटाने के लिए वृहद स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पिछले 40 वर्षों में इस संरक्षित क्षेत्र की सूरत पूरी तरह बदल गई है, जहां कभी किले के ऊंचे टीले और ऐतिहासिक अवशेष हुआ करते थे, वहां आज कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए हैं। संरक्षण के कड़े नियमों के बावजूद भूमाफिया और अतिक्रमणकारियों ने टीलों को काटकर बस्तियां बना लीं, जबकि प्रशासन की नाक के नीचे बिजली की लाइनें और मीटर भी लगा दिए गए। नगर पालिका और राजस्व विभाग की टीमें सर्वे कर रही हैं। सर्वे में 429 अतिक्रमणकारी चिह्नित किए गए हैं और अन्य बिंदुओं पर फिर से सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मकान स्वामियों को नोटिस देकर खाली करने की चेतावनी दी जाएगी। तय समय सीमा के बाद किला परिसर में बुलडोजर चलाने की भी तैयारी है, जिसके बाद किले को संरक्षित कर विकसित करने की योजना पर काम किया जाएगा।
राजा दयाराम का किला हाथरस के गौरवशाली इतिहास का साक्षी है। यह वही किला है जिसे अंग्रेजों ने तोपों से ध्वस्त करने का प्रयास किया था, लेकिन किले की मज़बूती के कारण वह सफल नहीं हो सके। अतिक्रमण में बिजली विभाग और नगर पालिका की भूमिका भी जांच के घेरे में है, क्योंकि बिना वैध दस्तावेज के संरक्षित क्षेत्र में सरकारी सुविधाएं कैसे पहुंचाई गईं, यह एक बड़ा सवाल है। विधायक सदर अंजुला माहौर की पहल पर जिलाधिकारी ने चार सदस्यीय टीम गठित की है, जिसमें एसडीएम सदर, सीओ सिटी, परियोजना अधिकारी डूडा और नगर पालिका के ईओ शामिल हैं। इस टीम ने 19 दिसंबर से अभिलेखों की जांच और स्थलीय सर्वे शुरू किया है। सर्वे के बाद जांच के मुख्य बिंदुओं में अतिक्रमणकारियों के आगमन और निवास का समय, पूर्व निवास की जानकारी, अनुमति और मिलीभगत, तथा वैकल्पिक व्यवस्था जैसी बातें शामिल हैं।

















