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हाथरस 20 जनवरी । हाथरस में दूषित खानपान, खराब जीवनशैली और दवाओं के सेवन में लापरवाही के कारण किडनी फेलियर के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। जिले के जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में पिछले तीन वर्षों में कुल 288 मरीज पंजीकृत हुए, जिनमें से 89 की मौत हो चुकी है, जबकि 189 मरीज अभी भी मशीनों पर जीवन रक्षक उपचार प्राप्त कर रहे हैं। केवल 10 मरीज ही किडनी ट्रांसप्लांट के जरिए इस मशीनी चक्र से बाहर निकल पाए हैं। बढ़ते मरीजों के दबाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने डायलिसिस यूनिट को तीन शिफ्टों में चलाना शुरू किया है। 10 अगस्त 2022 को शुरू हुई इस यूनिट में 10 बेड हैं, जिनमें से नौ सामान्य और एक आइसोलेटेड मरीजों के लिए आरक्षित है। पिछले तीन वर्षों में 259 मरीजों ने पंजीकरण कराया है और अब तक कुल 32,370 डायलिसिस सत्र किए जा चुके हैं। यदि यह उपचार प्राइवेट अस्पतालों में कराया जाता तो खर्च काफी अधिक होता, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अब तक लगभग 6.47 करोड़ रुपये खर्च कर इस सेवा को निशुल्क उपलब्ध कराया है। डॉक्टर भरत यादव ने बताया कि क्रिएटिनिन स्तर बढ़ने पर किडनी फेलियर की आशंका होती है। सामान्यतः पुरुषों में क्रिएटिनिन का स्तर 0.7 से 1.3 और महिलाओं में 0.6 से 1.1 मिलीग्राम/डेसीलीटर रहता है। डायलिसिस यूनिट में एक बड़ी कमी आइसोलेशन मशीन की है। संक्रमण के दौरान मरीजों को आइसोलेशन डायलिसिस की जरूरत होती है, लेकिन जिले में केवल एक आइसोलेशन मशीन उपलब्ध है और इस समय तीन संक्रमित मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। यूनिट के प्रबंधक शिवम प्रताप सिंह ने बताया कि इन मरीजों को फिलहाल दूसरे जिलों से कनेक्ट किया गया है। डॉक्टर सूर्यप्रकाश, सीएमएस ने कहा कि प्रशासन गुर्दा रोगियों को हरसंभव मदद कर रहा है और तीन शिफ्टों में उपचार जारी है। आवश्यकता के अनुसार आइसोलेशन वार्ड बढ़ाया जाएगा। विशेषज्ञों ने किडनी को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीने, संतुलित आहार, नमक और प्रोटीन की मात्रा नियंत्रित रखने, नियमित व्यायाम और उच्च रक्तचाप/डायबिटीज जैसी बीमारियों का समय पर उपचार कराने की सलाह दी है।

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