Hamara Hathras

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हाथरस 06 जनवरी । हाथरस जिले में प्रस्तावित नये हाथरस सृजन योजना का दायरा अब और बढ़ाया जाने वाला है। पहले जहां गांव नगला बाद अठवरिया के निकट लगभग 100 एकड़ भूमि पर नये हाथरस को विकसित किए जाने की योजना थी, वहीं अब बढ़ती आबादी, भविष्य की जरूरतों और शहरीकरण की तेज़ रफ्तार को देखते हुए इसे कहीं अधिक बड़े क्षेत्रफल में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। आवास विकास परिषद ने इस उद्देश्य से दोबारा सर्वे कराने का निर्णय लिया है। परिषद का मानना है कि पहले प्रस्तावित भूमि आने वाले वर्षों की जरूरतों के लिहाज से अपर्याप्त है, इसलिए अब उपलब्ध अधिक से अधिक भूमि को योजना में शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

जिला प्रशासन से मांगा गया भूमि का पूरा ब्यौरा

नये सिरे से योजना तैयार करने के लिए आवास विकास परिषद ने जिला प्रशासन से सरकारी एवं गैर-विवादित भूमि का विस्तृत विवरण मांगा है। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि कौन-कौन सी भूमि आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक उपयोग के लिए उपयुक्त है। सर्वे पूरा होने के बाद एक संशोधित और विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा, ताकि नये हाथरस को आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्मार्ट टाउनशिप के रूप में विकसित किया जा सके।

अन्य परियोजनाओं से टकराव नहीं होगा

योजना के तहत विनियमित क्षेत्र, यीडा (YEIDA) और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए पहले से प्रस्तावित भूमि को अलग रखते हुए ही नये हाथरस का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा, ताकि विभिन्न विकास एजेंसियों के कार्यों में कोई टकराव न हो और योजनाएं सुचारू रूप से आगे बढ़ सकें।

आवासीय के साथ मिलेंगी व्यावसायिक सुविधाएं

नये हाथरस सृजन योजना के अंतर्गत भविष्य में आवासीय कॉलोनियां, व्यावसायिक क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य सेवाएं, पार्क और हरित क्षेत्र, चौड़ी सड़कें और बेहतर यातायात व्यवस्था। विकसित किए जाने की संभावना है। इससे न केवल शहर पर बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम किया जा सकेगा, बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी सृजित होंगे।

योजना स्वीकृत हुई तो बदल जाएगी हाथरस की सूरत

यदि जिला प्रशासन और आवास विकास परिषद के समन्वय से यह योजना शासन स्तर पर स्वीकृत हो जाती है, तो आने वाले वर्षों में हाथरस का शहरी स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है और जिले के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। आवास विकास परिषद आगरा के एई गजेन्द्र सिंह ने बताया कि खाली भूमि की जानकारी जिला प्रशासन से प्राप्त की जा रही है, जिसके आधार पर ही नया और विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

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