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हाथरस 04 जनवरी । रमनपुर रोड स्थित प्राचीन त्रिभैरवनाथ सिद्धपीठ मंदिर परिसर में शनिवार को धार्मिक कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन साहित्य संगम द्वारा किया गया, जिसमें जनपद के साथ-साथ बाहर से आए ख्यातिप्राप्त कवियों ने अपनी ओजस्वी, भक्तिमय एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कवि दीपक रफी द्वारा माँ शारदा की वंदना से हुआ। इसके पश्चात आशु कवि अनिल बौहरे ने अपनी रचना
“सेवा संघर्ष में फौजी लगे रहते हैं,
फौजी 88वें वर्ष में 18 बरस के लगते हैं”

प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।

वरिष्ठ कवि श्याम बाबू ‘चिंतन’ ने फौजी को परशुराम स्वरूप बताते हुए ओजपूर्ण छंद सुनाया। वहीं डॉ. उपेंद्र झा ने सामाजिक यथार्थ पर आधारित पंक्तियाँ—
“दीपक को कोई तेल तक नहीं देता,
उगते सूरज को नमस्कार किया जाता है”

सुनाकर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।

कवि प्रदीप पंडित ने नववर्ष पर आधारित रचना प्रस्तुत की, जबकि साहित्यकार विद्यासागर ‘विकल’ और गोपाल चतुर्वेदी ने फौजी को बधाई व शुभकामनाओं से जुड़ी रचनाएं सुनाईं। कवि हरिशंकर सारस्वत ‘पं. हाथरसी’, आर.के. काकू, वैद्य मोहन बृजेश सहित अन्य कवियों ने भी काव्यपाठ किया। इसी दौरान डॉ. विकास शर्मा ने वेद भगवान के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ‘फौजी’ को शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। साहित्य संगम द्वारा डॉ. विकास शर्मा को संरक्षक पद पर मनोनीत किया गया, जिनका पदभार अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ‘फौजी’ एवं महामंत्री डॉ. उपेंद्र झा ने ग्रहण कराया। योगा पंडित योगेंद्र शर्मा अपने सहयोगियों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे और वेद भगवान के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ‘फौजी’ को 87वें जन्मदिवस पर शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। साथ ही 48वीं भगवान परशुराम शोभायात्रा के आयोजकों को भी पीत पटिका व छवि चित्र भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी कवियों को सम्मानित किया गया। मंदिर परिसर में गूंजते “धर्म की जय हो”, “अधर्म का नाश हो”, “विश्व का कल्याण हो” जैसे जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर महंत बाबा रामानंद, शशांक पचौरी, रंजन पचौरी, पवन दिवाकर, शैलेंद्र वशिष्ठ, मनोज वशिष्ठ सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मंदिर परिसर की साज-सज्जा एवं अतिथियों के स्वागत की व्यवस्था इंजीनियर देव स्वरूप शर्मा, कन्नू वर्मा व मंदिर के भक्तों द्वारा की गई, जिसकी सभी ने सराहना की। धार्मिक उल्लास और काव्य रस के संग यह धार्मिक कवि सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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