
नई दिल्ली 02 जनवरी । वैश्विक व्यापार में जारी उतार-चढ़ाव और वित्तीय चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत देने के लिए शुक्रवार को 7,295 करोड़ रुपये का व्यापक एक्सपोर्ट सपोर्ट पैकेज घोषित किया है। यह पैकेज विशेष रूप से एमएसएमई सेक्टर के निर्यातकों के लिए तैयार किया गया है ताकि उन्हें व्यापार के लिए कर्ज (ट्रेड फाइनेंस) आसानी से और किफायती दरों पर उपलब्ध हो सके। यह योजना 2025 से 2031 तक लागू रहेगी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस पैकेज का उद्देश्य निर्यातकों की पूंजी संबंधी समस्याओं का समाधान करना है। पैकेज को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है—ब्याज सहायता योजना के लिए 5,181 करोड़ रुपये और कोलेटरल सपोर्ट के लिए 2,114 करोड़ रुपये। ब्याज सहायता योजना के तहत, पात्र एमएसएमई निर्यातकों को प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट क्रेडिट पर 2.75 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। हालांकि, प्रति फर्म इस योजना का सालाना लाभ 50 लाख रुपये तक सीमित होगा। कोलेटरल सपोर्ट के तहत, निर्यात से जुड़े वर्किंग कैपिटल लोन (कार्यशील पूंजी ऋण) के लिए क्रेडिट गारंटी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके तहत प्रति फर्म 10 करोड़ रुपये तक की गारंटी दी जाएगी, जिससे निर्यातकों को बिना अतिरिक्त संपत्ति गिरवी रखे कर्ज लेने में मदद मिलेगी। यह कदम वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताओं और वित्तीय दबावों के समय भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी दरों पर कर्ज उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया है। यह घोषणा नवंबर 2025 में शुरू किए गए 25,060 करोड़ रुपये के ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ (EPM) का दूसरा प्रमुख घटक है। पहले इसके तहत 31 दिसंबर 2025 को 4,531 करोड़ रुपये का मार्केट एक्सेस सपोर्ट लॉन्च किया गया था। वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि ब्याज सहायता और कोलेटरल सपोर्ट का लाभ केवल चयनित उत्पादों की पॉजिटिव लिस्ट पर ही मिलेगा। इस सूची में रक्षा उत्पाद और SCOMET आइटम शामिल हैं, जबकि प्रतिबंधित वस्तुएं, वेस्ट और स्क्रैप, तथा पीएलआई योजना के तहत लाभान्वित उत्पाद इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे।
वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अजय भादू ने कहा कि यह पैकेज निर्यातकों की वित्तीय बाधाओं को दूर करेगा और उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएगा। योजना के विस्तृत दिशानिर्देश जल्द ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और डीजीएफटी द्वारा जारी किए जाएंगे। आरबीआई इस योजना की कार्यान्वयन एजेंसी होगी और निर्यातकों की पात्रता और प्रक्रिया की निगरानी करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पैकेज एमएसएमई निर्यातकों के लिए वित्तीय स्थिरता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल छोटे और मध्यम उद्यमों को कर्ज आसानी से उपलब्ध होगा, बल्कि वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच और लाभप्रदता में भी वृद्धि होगी।



















