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नई दिल्ली 28 नवंबर । भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 8.2 प्रतिशत रही, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 5.6 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह छह तिमाहियों में सबसे उच्च वृद्धि दर है। वृद्धि के पीछे मुख्य कारण जीएसटी दर में कटौती के बाद उपभोग में बढ़ोतरी की उम्मीद और कारखानों में उत्पादन वृद्धि को बताया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीडीपी के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह लोगों की कड़ी मेहनत और उद्यमशीलता का परिणाम है। उन्होंने कहा, “यह हमारी विकास-समर्थक नीतियों और सुधारों के प्रभाव को भी दर्शाता है। हमारी सरकार सुधारों को आगे बढ़ाती रहेगी और प्रत्येक नागरिक के लिए जीवन की सुगमता को मजबूत करेगी।” विनिर्माण क्षेत्र में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिली। देश के जीडीपी का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा विनिर्माण क्षेत्र का है, जो इस तिमाही में 9.1 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह केवल 2.2 प्रतिशत था।

राजकोषीय घाटा बढ़ा

वहीं, अप्रैल से अक्टूबर तक के सात महीनों में भारत का राजकोषीय घाटा 8.25 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वार्षिक अनुमान का 52.6 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष के 46.5 प्रतिशत से अधिक है। सरकार इस वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी का 4.4 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य रखती है, जबकि पिछले वर्ष यह 4.8 प्रतिशत था।

औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े 1 दिसंबर को जारी होंगे

सरकार ने बताया कि अक्तूबर 2025 के औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़े अब 1 दिसंबर 2025 को शाम 4 बजे जारी किए जाएंगे। पहले यह आंकड़ा 28 नवंबर को आने वाला था, लेकिन जीडीपी तिमाही अनुमानों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए तारीख बदली गई।

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