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हाथरस 02 अप्रैल । जिले में अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों की जेब पर अब ईंटों की महंगाई का बोझ बढ़ने वाला है। अंतरराष्ट्रीय कारणों और टैक्स की मार के चलते कोयले के दामों में आई भारी तेजी ने ईंट भट्ठा उद्योग को संकट में डाल दिया है। इसके चलते ईंटों की कीमतों में प्रति ईंट 1 से 2 रुपये तक की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। ईंट व्यापारियों के अनुसार, भारत में कोयले की मुख्य आपूर्ति इंडोनेशिया और अमेरिका से होती है। लेकिन खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण समुद्री मार्ग प्रभावित हुआ है। इसका असर यह हुआ है कि जो कोयला पहले 16 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब उछलकर 24 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसके अलावा, आयात करने वाले जहाजों को वापसी में पर्याप्त माल न मिलने के कारण मालभाड़े में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर कोयले की लैंडिंग कॉस्ट पर पड़ा है।

जिले में संचालित लगभग 180 ईंट भट्ठों में से 120 भट्ठे ‘जिक-जैक’ तकनीक पर आधारित हैं। इस तकनीक में कोयले की खपत अधिक होती है। भट्ठा संचालकों का कहना है कि सरकार ने कोयले पर जीएसटी (GST) की दर को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण अब 6 से 7 रुपये में बिकने वाली ईंट की कीमत 8 रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। कोयले की इस महंगाई ने भट्ठा संचालकों के सामने संकट खड़ा कर दिया है, जिसकी भरपाई वे ईंटों के दाम बढ़ाकर करने को मजबूर हैं। इसका सीधा असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ेगा जो घर बनाने की योजना बना रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले दिनों में निर्माण सामग्री और भी महंगी हो सकती है।

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