
हाथरस 17 जनवरी । समाज कल्याण विभाग में फर्जी दस्तावेजों से जीजा पर साले की नौकरी लगवाने का आरोप है। अब इस मामले में पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर जीजा-साले के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा दर्ज कर पुलिस मामले की जांच में जुटी है। कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र की विवेकानंद नगर कॉलोनी निवासी नीरज उपाध्याय ने अपने ससुर कोमल किशोर निवासी साकेत कॉलोनी और उसके जीजा रामेश्वर उपाध्याय पूर्व सीओ पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए अधिकारियों से शिकायत की। जिसमें नीरज उपाध्याय ने आरोप लगाया कि पूर्व में सीओ रहे रामेश्वर दयाल ने अपने प्रभाव का दुरूपयोग कर अपने साले कोमल किशोर के शैक्षिक कागजातों में हेराफेरी कर सही उम्र 20 जनवरी 1958 के स्थान पर फर्जी व कूटरचित जन्मतिथि 20 जनवरी 1961 कर कूटरचित व फर्जी हाईस्कूल प्रमाण पत्र बनवाकर दे दी। जिसके आधार पर साले को अनुचित लाभ लेने और सरकार व योग्य उम्मीदवार को अनुचित हानि देने का दूषित आशय है। इसी के आधार पर आरोपी ने समाज कल्याण विभाग में अनुचित व फर्जी तरीके से नौकरी प्राप्त कर वेतन के रूप में धनराशि प्राप्त की है। इस संबंध में नीरज उपाध्याय ने शिकायत विभिन्न अधिकारियों की, जिसके बाद समाज कल्याण आयुक्त इलाहाबाद के आदेश पर तीन सदस्यीय कमेटी गठित हुई।
कमेटी ने जांच में पाया कि कोमल किशोर उस पद के योग्य नहीं था, विभाग ने कागजातों का सत्यापन नहीं किया और उसे पदमुक्त किया जाना था। विभाग द्वारा आरोपी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में पुलिस पर भी कार्रवाई न करने का आरोप है। जिसके बाद नीरज उपाध्याय ने कोर्ट की शरण ली और अब कोर्ट ने पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश देते हुए कहा है कि रामेश्वर दयाल पाठक पर अपने पद का दुरूपयोग कर अपने साले कोमल किशोर शर्मा के कूटरचित हाईस्कूल प्रमाण पत्र बनवाने, कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग कर जूनियर क्लर्क के पद की अनैतिक व फर्जी रूप से नौकरी प्राप्त करने के गंभीर आरोप लगाये गये हैं। प्रार्थना पत्र के साथ दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में प्रमाण पत्र व आधार कार्ड की छायाप्रति आदि दाखिल किया गया है। उपरोक्त समस्त विवेचना से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध कारित किया जाना प्रतीत होता है। अतः विवेचना कराया जाना आवश्यक प्रतीत होता है। सीओ सदर योगेंद्र कृष्ण नारायन ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
















