
हाथरस 27 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-तृतीय के आदेशानुसार जिला न्यायालय, हाथरस के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में विधिक साक्षरता क्लब के नोडल शिक्षकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस अनु चौधरी की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य जिले के शासकीय एवं अशासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में संचालित लीगल लिटरेसी क्लब को अधिक सक्रिय, प्रभावी और उद्देश्यपूर्ण बनाना है। अभियान के प्रथम चरण में 37 विद्यालयों के शिक्षक-प्रभारियों को नोडल शिक्षक के रूप में नामित किया गया है। ये शिक्षक विद्यालयों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच समन्वय स्थापित करते हुए कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए संवैधानिक जागरूकता अभियान संचालित करेंगे। प्रशिक्षण के पहले सत्र में न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू चन्द्रा, सिविल जज (जू.डि.)/एफटीसी-द्वितीय अरिजीत सिंह और सिविल जज (जू.डि.)/एफटीसी-प्रथम रोबिन कुमार ने संविधान निर्माण, संविधान निर्माताओं के योगदान, प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों, संवैधानिक उपचारों, राज्य के नीति निदेशक तत्वों और मौलिक कर्तव्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संविधान सभा ने दो वर्ष, 11 महीने और 18 दिन के परिश्रम के बाद देश को लिखित संविधान प्रदान किया। संविधान की प्रस्तावना को उसकी आत्मा और कुंजी बताते हुए संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और लोकतंत्रात्मक गणराज्य की अवधारणा के साथ नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता और समता सुनिश्चित करने के संकल्प पर प्रकाश डाला गया। इस दौरान समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार और संवैधानिक उपचार सहित छह मौलिक अधिकारों की जानकारी दी गई।
न्यायिक अधिकारियों ने संवैधानिक उपचारों की महत्ता समझाते हुए बताया कि संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में क्रमशः सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। बंदी प्रत्यक्षीकरण और परमादेश जैसी रिट के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही राज्य के नीति निदेशक तत्वों की भूमिका और अनुच्छेद 51ए के तहत नागरिकों के 11 मौलिक कर्तव्यों पर चर्चा की गई। शिक्षकों को बताया गया कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन भी जरूरी है, ताकि देश की एकता, अखंडता और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। द्वितीय सत्र में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल ऋतुराज सिंह और असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल आशुतोष गौतम ने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका समझाई। इसके साथ ही बच्चों की सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील कानूनों, जैसे पॉक्सो अधिनियम, बाल विवाह निषेध कानून और बाल श्रम उन्मूलन अधिनियम की प्रमुख जानकारियां दी गईं। प्रशिक्षण के तृतीय सत्र में मध्यस्थ अधिवक्ता रमेश चन्द्र वर्मा और संदीप वर्मा ने निःशुल्क विधिक सहायता तथा लोक अदालत की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
अधिवक्ताओं ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 39ए के तहत समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था की गई है, ताकि आर्थिक या अन्य अक्षमता के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। पात्र व्यक्तियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क अधिवक्ता, अदालती शुल्क में छूट और कानूनी दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं। लोक अदालत को आपसी सहमति से विवादों का शीघ्र और सुलभ निस्तारण करने का प्रभावी माध्यम बताते हुए इसके लाभों की जानकारी दी गई। शिक्षकों को राष्ट्रीय विधिक सहायता हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में भी प्रशिक्षित किया गया, ताकि वे इस सुविधा की जानकारी विद्यार्थियों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा सकें। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से नोडल शिक्षकों को संविधान, कानूनी अधिकारों, बच्चों की सुरक्षा, निःशुल्क विधिक सहायता और लोक अदालत से संबंधित जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यालय स्तर पर कानूनी जागरूकता बढ़ाना और विद्यार्थियों को उनके संवैधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाना है।









